देहरादून। उत्तराखंड कांग्रेस के भीतर मचा सियासी घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार को पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की पार्टी आलाकमान से होने वाली अहम मुलाकात किन्हीं कारणों से टल गई, जिससे राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। विलंब से दिल्ली पहुंचे वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल और प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा को संदेश भेजकर अब गुरुवार या शुक्रवार का नया समय मांगा है।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, बुधवार को हरिद्वार में पार्टी के एक कार्यक्रम के तुरंत बाद प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा दिल्ली के बजाय सीधे अंबाला के लिए रवाना हो गईं थीं। इसी बीच, दिल्ली यात्रा के दौरान हरीश रावत ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपना दर्द बयां करते हुए एक बड़ा राजनीतिक बयान दिया। उन्होंने लिखा कि अपने 60 साल के लंबे राजनीतिक जीवन में यह पहला मौका है जब वह पार्टी आलाकमान के सामने किसी स्पष्टीकरण के लिए जा रहे हैं।
हरीश रावत ने स्पष्ट किया कि आगामी 14 अक्टूबर को कांग्रेस पार्टी के साथ उनके जुड़े हुए पूरे 58 वर्ष हो जाएंगे। इसके अलावा वह दो साल पहले से कांग्रेस की युवा शाखा से सक्रिय रूप से जुड़ गए थे, जिसके चलते कांग्रेस परिवार के साथ उनके जुड़ाव के पूरे 60 साल हो रहे हैं। उन्होंने खुले तौर पर स्वीकार किया कि इन छह दशकों के सफर में उनसे अनजाने में कई गलतियां भी हुई होंगी, लेकिन पार्टी ने कभी उनसे जवाबतलब नहीं किया। अब वह खुद अपनी इच्छा से पार्टी शीर्ष नेतृत्व के समक्ष अपना पक्ष रखने और स्पष्टीकरण देने के लिए पूरी तरह उत्सुक हैं।
दूसरी ओर, मंगलोर विधानसभा सीट के भविष्य और संभावित बदलाव को लेकर कांग्रेस के भीतर बयानों का विरोधाभास देखने को मिल रहा है। हाल ही में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने नई दिल्ली से उत्तराखंड लौटते समय मंगलोर विधानसभा सीट में बदलाव की बात कही थी, जिसने सियासी हवा तेज कर दी थी।
इस बयान पर पलटवार करते हुए प्रदेश कांग्रेस प्रभारी कुमारी सैलजा ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट किया कि मंगलोर विधानसभा सीट पर किसी भी प्रकार का बदलाव होने वाला नहीं है। सैलजा ने जोर देकर कहा कि पार्टी विधायक काजी निजामुद्दीन ने उपचुनाव में तब जीत दर्ज की थी जब पूरी भाजपा सरकार की मशीनरी उनके खिलाफ मैदान में उतरी थी।
कुमारी सैलजा ने पूर्ण विश्वास जताते हुए कहा कि काजी निजामुद्दीन आगामी विधानसभा चुनाव में भी इसी सीट से भारी बहुमत के साथ दोबारा जीत हासिल करेंगे। उन्होंने यह भी दावा किया कि आने वाले 2027 के चुनावों में पूरे उत्तराखंड में बदलाव की लहर दौड़ेगी और कांग्रेस पार्टी भारी बहुमत के साथ सत्ता में वापसी करेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हरीश रावत के बयानों और पार्टी प्रभारी के रुख के बीच का यह अंतर उत्तराखंड कांग्रेस की आंतरिक कलह को सतह पर ले आया है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जब हरीश रावत की आलाकमान से मुलाकात होगी, तो पार्टी इस डैमेज कंट्रोल को कैसे संभालती है।

