BJP Ticket Allocation: ग्राउंड रिपोर्ट होगी सर्वोपरि, मंडल अध्यक्ष तय करेंगे कौन होगा प्रत्याशी..

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देहरादून। उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी संगठनात्मक गतिविधियों को तेज करते हुए टिकट वितरण की रणनीति पूरी तरह बदल दी है। हल्द्वानी के चोरगलिया गौलापार स्थित रिजॉर्ट में आयोजित भाजपा की अहम बैठक में यह साफ कर दिया गया कि इस बार विधायकों के टिकट तय करने में मंडल अध्यक्षों और जिलाध्यक्षों की राय सर्वोपरि होगी। क्षेत्र में कमजोर पकड़ रखने वाले विधायकों का टिकट कट सकता है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और पार्टी नेतृत्व के नए फॉर्मूले के तहत गढ़वाल और कुमाऊं दोनों मंडलों के अध्यक्षों से मिलने वाले जमीनी फीडबैक को ही अंतिम आधार माना जाएगा। बैठक में पदाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में जनता का मूड भांपते रहें। विधायकों की लोकप्रियता, जनता के असंतोष और विपक्ष के प्रभाव का सटीक आकलन कर रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया है।

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पार्टी सूत्रों के मुताबिक भाजपा के एक अंदरूनी सर्वे में भी कई मौजूदा विधायकों के प्रदर्शन को लेकर नकारात्मक रिपोर्ट आई है। संगठन का पूरा जोर इस बार केवल जिताऊ और लोकप्रिय चेहरों पर दांव लगाने का है। प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने दो टूक कहा है कि चुनाव में प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया में मंडल अध्यक्षों और जिलाध्यक्षों की राय बेहद निर्णायक और महत्वपूर्ण रहने वाली है।

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हल्द्वानी की इस हाई-प्रोफाइल बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी समेत पार्टी के तमाम वरिष्ठ नेता, मंत्री और विधायक मौजूद रहे। मुख्यमंत्री धामी ने कार्यकर्ताओं का अभिवादन स्वीकार करते हुए संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने का आह्वान किया। बैठक में मौजूद नेताओं ने एक सुर में एकजुटता का दावा करते हुए कहा कि पार्टी जिसे भी प्रत्याशी बनाएगी, उसे भारी बहुमत से जिताया जाएगा।

पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और वरिष्ठ विधायक बिशन सिंह चुफाल ने अपनी दावेदारी पर बेबाकी से बात रखी। उन्होंने कहा कि 2022 का चुनाव जीतने के तुरंत बाद से ही वे अगले चुनाव की तैयारी में जुट गए थे। चुफाल ने कहा कि वे युवाओं के उत्साह के साथ दोबारा मैदान में उतरेंगे और जीत दर्ज करेंगे, क्योंकि उन्होंने धरातल पर जनता के काम किए हैं।

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वहीं, वरिष्ठ भाजपा नेता बंशीधर भगत ने कहा कि संगठन जिस पर भी भरोसा जताएगा, पार्टी उसके लिए पूरी ताकत से लड़ेगी। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे स्वयं अपनी सीट से चुनाव लड़ने के प्रबल और स्वाभाविक दावेदार हैं। पार्टी के इस नए रुख से ढीले पड़े विधायकों में हड़कंप है, जबकि मंडल स्तर के कार्यकर्ताओं की पूछ बढ़ने से उनमें भारी उत्साह देखा जा रहा है।

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