देहरादून। देहरादून में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के भीतर चुनावी घड़ी में ऑल इज वेल नहीं झलक रहा है, कैबिनेट मंत्री खजानदास के कड़े विरोध के बाद प्रदेश भाजपा कार्यालय में आयोजित नए सदस्यों का सदस्यता ग्रहण कार्यक्रम ऐन वक्त पर स्थगित कर दिया गया। माना जा रहा है कि रविवार को यमुना कॉलोनी स्थित मंत्री के सरकारी आवास के बाहर हुए हंगामे और लगाए गए इल्जाम से मंत्री जी आहत हैं।
लिहाजा हंगामे के अगले दिन मधु चौहान के नेतृत्व में 26 परिवारों के 60 सदस्यों को पार्टी में शामिल कराने की तैयारी अधूरी रह गई। हालांकि भाजपा प्रदेश कार्यालय में नए साथियों का स्वागत करने के लिए मिठाई और भगवा पटके तक तैयार रखे गए थे, लेकिन जैसे ही समाज कल्याण मंत्री खजानदास प्रदेश दफ्तर पहुंचे।
नए सदस्यों का दाखिला खारिज हो गया, माहौल तनावपूर्ण हो गया और कार्यक्रम का आगाज़ से पहले ही अंत हो गया। संगठन की ओर से संदेश दिया गया कि प्रदेश अध्यक्ष की गैरमौजूदगी के चलते नए सदस्यों की एंट्री प्रक्रिया को अग्रिम निर्देशों तक के लिए स्थगित किया जाता है।
उधर कैबिनेट मंत्री खजानदास ने मीडिया के सामने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर नहीं की लेकिन उनके तेवर तल्ख थे जो साफ जाहिर कर रहे थे कि वे अपने आवास के बाहर हुए विरोध प्रदर्शन से काफी नाराज हैं। मामला तूल पकड़ता देख विवाद में शामिल धड़े को बैकफुट पर आना पड़ा। हंगामे में शामिल पार्टी पदाधिकारी गीताराम गौड़ ने मीडिया के सामने आकर कैबिनेट मंत्री खजानदास और मुख्यमंत्री से सार्वजनिक रूप से माफी मांग ली।
यह पूरा राजनीतिक घटनाक्रम भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के उस रणनीति को कमजोर करने वाला माना जा रहा है जिसमें उन्होंने उत्तराखंड की उन सीटों पर खास फोकस करने का निर्देश दिया था जहां भाजपा आज तक चुनाव नहीं जीत सकी है।
इसमें देहरादून जिले की चकराता विधानसभा सीट प्रमुख है, जहां से भाजपा पूर्व में मधु चौहान को प्रत्याशी बना चुकी है। मंत्री आवास पर हुए हंगामे और सदस्यता कार्यक्रम के दौरान मधु चौहान खुद भी मौजूद थीं। हालांकि, हंगामा करने वाले गुट के पदाधिकारियों के मीडिया के सामने माफी मांग लेने के बाद भी हालात काबू में नहीं दिख रहे हैं।
जिस तरह से मंत्री खजानदास की नाराजगी के चलते नए सदस्यों का स्वागत टालना पड़ा, उससे आगामी चुनावों में चकराता में कमल खिलाने के पार्टी के लक्ष्य पर सवाल खड़े होने लगे हैं। राजनीति के जानकारों का मानना है कि यदि नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच यह अंदरूनी जंग जल्द खत्म नहीं हुई, तो चकराता सीट पर कमल खिलाने का सपना अधूरा रह सकता है।
क्योंकि जब तक निचले स्तर पर कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं के बीच हाथ और दिल नहीं मिलेंगे तब तक चकराता के चुनावी मैदान में पार्टी को चुनौतियों का सामना ही करना पड़ेगा। लिहाजा जरूरत है आलाकमान को उस साबुन का इस्तमाल करने की जिससे दिलों में पैदा हुआ मैल साफ हो जाए और चकराता की राह आसान हो जाए।

