देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सोमवार को देहरादून में एक बड़ा बयान देते हुए देवस्थान में भ्रष्टाचार के आरोपों पर गहरी चिंता जताई है। मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि देवस्थान में लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की पूरी तरह से निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
त्रिवेंद्र सिंह रावत के इस बयान के बाद राज्य के राजनीतिक और धार्मिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देवस्थानों में इस तरह की घटनाएं किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं हैं, क्योंकि इससे करोड़ों देशवासियों की धार्मिक भावनाओं और विश्वास को ठेस पहुंचती है।
सोमवार को पत्रकारों से रूबरू हुए सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि देवस्थान में इस तरह की घटनाओं के सामने आने से देशवासियों की आस्था पर गहरी चोट पहुंची है। इस प्रकार के मामलों में किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जानी चाहिए।
‘सनातनियों की आस्था पर न आए आंच’
पूर्व मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि समयबद्ध और निष्पक्ष जांच के साथ कठोर कार्रवाई ही एकमात्र जरिया है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि सनातनियों की आस्था पर कोई आंच न आए। उन्होंने धार्मिक स्थलों की पवित्रता बनाए रखने के लिए कड़े कदम उठाने की वकालत की।
सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने श्रद्धालुओं की भावनाओं को रेखांकित करते हुए कहा कि भगवान के पवित्र दरबार में लोग परमआनंद की अनुभूति के लिए आते हैं। लेकिन जब ऐसे स्थलों से नकारात्मक खबरें या माहौल सामने आता है, तो वह लोगों की गहरी आस्था को प्रभावित कर सकता है।
उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि भगवान के दरबार में सभी लोग एक समान यानी चाकर की तरह रहें। किसी भी व्यक्ति के अंदर खुद को व्यवस्था या स्थान का मालिक समझने जैसा अहंकार का भाव बिल्कुल भी नहीं आने दिया जाना चाहिए।
इस महत्वपूर्ण बयान के जरिए त्रिवेंद्र सिंह रावत ने साफ संदेश दिया है कि धार्मिक व्यवस्थाओं में पारदर्शिता और शुचिता सबसे ऊपर होनी चाहिए, और किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार पर सरकार को सख्त रुख अपनाना चाहिए।

