टिहरी केतन हत्याकांड: SC आयोग ने लिया स्वतः संज्ञान, SSP को 15 जून तक रिपोर्ट का नोटिस

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उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल से एक बेहद हृदयविदारक और आक्रोशित कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां प्रतापनगर के देवल गांव निवासी एक दलित युवक केतन की प्रेम-प्रसंग के चलते बेरहमी से हत्या कर दी गई। इस जघन्य हत्याकांड के बाद से पूरे क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई है।

मंगलवार को जिला अस्पताल बौराड़ी में शव का पोस्टमार्टम होने के बाद भी मृतक के परिजनों और ग्रामीणों ने शव को उठाने से साफ इनकार कर दिया और देर रात तक न्याय की मांग पर अड़े रहे। परिजनों और भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं का स्पष्ट कहना है कि जब तक इस खौफनाक वारदात और मारपीट में शामिल सभी दोषियों को पुलिस गिरफ्तार कर जेल नहीं भेज देती, तब तक शव का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा।

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अस्पताल परिसर में भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने जबरदस्त नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। स्थिति को संभालने के लिए जिला प्रशासन लगातार परिजनों को मनाने में जुटा रहा, जिसके तहत जिलाधिकारी नितिका खंडेलवाल और एसएसपी श्वेता चौबे ने आरोपियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई का भरोसा दिलाया और प्रशासन की ओर से मृतक के परिजनों को 8 लाख 25 हजार रुपये की मुआवजा राशि भी मंजूर की गई है।

इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी यशवीर और उसके पिता विद्या सिंह को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सीओ महेश लखेड़ा को जांच सौंपी गई है।

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इस घटना में क्रूरता की सारी हदें पार होने की बात सामने आई है; मृतक के पिता धनपाल लाल ने रोंगटे खड़े कर देने वाला आरोप लगाते हुए कहा कि आरोपियों ने केतन की हत्या करने से पहले उसके पैरों में कीलें ठोंकी थीं, जिससे तड़प-तड़प कर उसकी जान चली गई, उन्होंने न्यायालय से मांग की है कि इन दरिंदों को मौत की सजा दी जाए।

इस मामले की गूंज अब शासन स्तर पर भी सुनाई दे रही है; उत्तराखंड अनुसूचित जाति आयोग ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए टिहरी गढ़वाल के एसएसपी को कड़ा नोटिस जारी कर दिया है। आयोग ने उत्तराखंड अनुसूचित जाति आयोग अधिनियम 2003 की धाराओं के तहत मामले की विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं और टिहरी पुलिस कप्तान को 15 जून तक सभी रिपोर्ट, अभिलेखों और सबूतों के साथ आयोग के समक्ष प्रस्तुत होने को कहा है।

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ऐसा न करने पर एसएसपी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए समन जारी किया जा सकता है। इस बीच, भीम आर्मी और अंबेडकर जन विकास समिति घनसाली सहित कई संगठनों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को संबोधित एक ज्ञापन एसडीएम घनसाली मंजू राजपूत के माध्यम से भेजा है, जिसमें पीड़ित परिवार को जल्द से जल्द पूर्ण न्याय दिलाने और दोषियों को फांसी की सजा देने की मांग की गई है।

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