देहरादून नगर निगम के स्वच्छता अनुभाग की बैठक में नगर आयुक्त आलोक कुमार पांडेय ने सफाई व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और मजबूत बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा की। इस योजना के तहत शहर के 57 वार्डों में डोर-टू-डोर कूड़ा शुल्क वसूलने की जिम्मेदारी संभाल रहीं स्वयं सहायता समूहकी महिलाओं को जल्द ही मौके पर ही चालान काटने का अधिकार दिया जा सकता है।
दरअसल, इन महिला समूहों ने सराहनीय कार्य करते हुए उन वार्डों से करीब सवा करोड़ रुपये का राजस्व निगम के खाते में जमा कराया है, जहां पिछले कई सालों से एक नया पैसा भी वसूल नहीं हो पा रहा था। इस बेहतरीन प्रदर्शन के बावजूद कुछ लोग न तो इन महिलाओं को कूड़ा शुल्क दे रहे हैं और उल्टा वार्डों में उनका विरोध भी कर रहे हैं।
इसी समस्या को देखते हुए नगर निगम एक्ट के तहत इसका तकनीकी और कानूनी समाधान खोजा जा रहा है, ताकि महिलाओं को चालान की शक्ति देकर निगम की आय और शहर की स्वच्छता दोनों को एक साथ बेहतर किया जा सके।
इसके साथ ही, महिलाओं की सुरक्षा और सहूलियत को ध्यान में रखते हुए उन्हें कैश संभालने के झंझट से मुक्ति दिलाने की भी तैयारी है। इसके लिए उन्हें डिजिटल स्वाइप मशीन और क्यूआर कोड की सुविधा मुहैया कराई जाएगी, ताकि अधिक से अधिक भुगतान सीधे और सुरक्षित तरीके से नगर निगम के अधिकृत खाते में पहुंच सके।
इसके अलावा, विभाग में अनुशासन, गंभीरता और फील्ड पर एक नई पहचान स्थापित करने के लिए नगर निगम ने अपनी स्वच्छता टीम के सभी कर्मचारियों के लिए एक समान ड्रेस कोड लागू करने का भी निर्णय लिया है। इस नए ड्रेस कोड के दायरे में जमीन पर काम करने वाले पर्यावरण मित्रों से लेकर मुख्य सफाई निरीक्षक तक सभी शामिल होंगे, जिससे उनकी पहचान और विश्वसनीयता दोनों मजबूत होगी।

