उत्तराखंड के प्रतिष्ठित दून अस्पताल में सोमवार को उस समय भारी हंगामा और अफरा-तफरी मच गई, जब स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल के प्रस्तावित दौरे से ठीक पहले कैबिनेट मंत्री खजान दास अस्पताल का जायजा लेने पहुंचे। अस्पताल प्रबंधन द्वारा वीआईपी दौरे की तैयारियों के बीच आम मरीजों की घोर अनदेखी और इलाज में देरी का आरोप लगाते हुए मरीजों और तीमारदारों ने कैबिनेट मंत्री के सामने ही अस्पताल प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी और हंगामा शुरू कर दिया।
दरअसल, स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल को अस्पताल में चार नई अत्याधुनिक सुविधाओं सिस्मेक्स मशीन, ओबेसिटी क्लीनिक, डायनामिक डिजिटल रेडियोग्राफी और बेरियाट्रिक सर्जरी विभाग का लोकार्पण करने के लिए दोपहर 2:00 बजे पहुंचना था, लेकिन किन्हीं अपरिहार्य कारणों से वे समय पर नहीं आ सके और शाम करीब 6:00 बजे अस्पताल पहुंचे। इस चार घंटे की देरी के बीच जब कार्यक्रम में शामिल होने आए समाज कल्याण मंत्री खजान दास ने खुद वार्डों का निरीक्षण करना शुरू किया, तो अस्पताल की खोखली व्यवस्थाओं की पोल खुल गई।

जब मंत्री खजान दास को लेकर अस्पताल के अधिकारी इमरजेंसी के प्लास्टर कक्ष पहुंचे और वहां की 24 घंटे सेवा उपलब्ध होने जैसी खूबियां गिनाने लगे, तो हकीकत इसके बिल्कुल उलट निकली। कक्ष के भीतर एक भी स्वास्थ्यकर्मी या डॉक्टर मौजूद नहीं था, जबकि बाहर व्हीलचेयर और बेंच पर कई गंभीर मरीज तड़प रहे थे।
मरीज अनिकेत ने मंत्री को रोककर आपबीती सुनाई कि वे करीब डेढ़-दो घंटे से सिर्फ प्लास्टर लगवाने के लिए डॉक्टर का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। अनिकेत ने तीखे शब्दों में सवाल किया कि “मरीजों का इलाज प्राथमिकता होना चाहिए या नई मशीनों का उद्घाटन?”

इसी तरह तीमारदार अज्जू, रेनू और रवीना ने भी लंबे समय से इलाज न मिलने और करुणलता नाम की एक बुजुर्ग महिला को भारी तकलीफ होने का आरोप लगाया। इस पर मंत्री खजान दास ने कड़ी नाराजगी जताते हुए अस्पताल की प्राचार्य डॉ. गीता जैन को तुरंत सभी मरीजों का उपचार शुरू कराने के सख्त निर्देश दिए, जिसके बाद आनन-फानन में स्वास्थ्यकर्मियों को बुलाकर इलाज शुरू कराया गया। देरी होने के कारण मंत्री खजान दास लोकार्पण से पहले ही वापस लौट गए।
शाम को पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने चारों नई सुविधाओं का विधिवत उद्घाटन किया और अधिकारियों के साथ प्रशासनिक स्तर पर एक अहम समीक्षा बैठक की। अस्पताल की बदहाली और रेफरल की प्रवृत्ति पर सख्त रुख अपनाते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी और कहा कि “दून अस्पताल को सिर्फ एक रेफरल सेंटर न बनने दें।” उन्होंने निर्देश दिया कि अत्यंत आवश्यकता होने पर ही किसी मरीज को उच्च संस्थान में रेफर किया जाए और इसकी अग्रिम जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को भी अनिवार्य रूप से दी जाए।

इसके साथ ही उन्होंने अस्पताल की सफाई व्यवस्था सुधारने, PRO सिस्टम को मजबूत करने और आयुष्मान योजना के तहत अधिक से अधिक गरीब मरीजों को मुफ्त व त्वरित लाभ पहुंचाने पर विशेष जोर दिया। इस दौरान अस्पताल के निदेशक डॉ. अजय आर्य, प्राचार्य डॉ. गीता जैन और चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरएस बिष्ट सहित कई वरिष्ठ चिकित्सक मौजूद रहे।

