उत्तराखंड राज्य उपभोक्ता आयोग ने बिजली बिल विवाद को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और नजीर बनने वाला फैसला सुनाया है। आयोग ने साफ किया है कि यदि तकनीकी खराबी की वजह से कोई बिजली मीटर वास्तविक खपत से कम रीडिंग दिखा रहा हो, तब भी उपभोक्ता को राहत नहीं मिलेगी और उसे असल बिजली खपत के अनुसार ही बिल का भुगतान करना अनिवार्य होगा।
इस फैसले के साथ ही राज्य आयोग ने पौड़ी जिला उपभोक्ता फोरम के उस पुराने आदेश को पूरी तरह निरस्त कर दिया है, जिसमें उपभोक्ता को बिजली बिल में राहत देने, नए मीटर का खर्च उठाने और मानसिक उत्पीड़न का हर्जाना देने के निर्देश ऊर्जा निगम को दिए गए थे।
यह पूरा मामला कोटद्वार के रहने वाले चंद्रपाल सिंह से जुड़ा है, जिनके बिजली मीटर की जांच में पाया गया था कि मीटर बिना किसी मानवीय छेड़छाड़ के तकनीकी रूप से 85 प्रतिशत धीमा चल रहा था। इसके बाद ऊर्जा निगम ने वास्तविक खपत का आकलन करते हुए उन्हें 26,450 रुपये का अनुमानित बिल जारी किया था। उपभोक्ता द्वारा इस राशि का भुगतान न करने पर विभाग ने उनका बिजली कनेक्शन काट दिया था।
राज्य उपभोक्ता आयोग ने इस मामले में ऊर्जा निगम की कार्रवाई को बिल्कुल सही ठहराया और कहा कि बिल पर किसी भी तरह की आपत्ति होने की स्थिति में उपभोक्ता को 30 दिनों के भीतर विद्युत अधिनियम की धारा 127 के तहत कानूनी अपील दर्ज करनी चाहिए थी। इस बड़े फैसले के बाद अब उपभोक्ताओं के लिए मीटर की तकनीकी खराबी की आड़ में कम बिल आने का लाभ लेना मुमकिन नहीं होगा।

