रुड़की के खाड़ क्षेत्र के 9 गांवों में आज भी नेटवर्क गायब, ‘4G सेचुरेशन योजना’ ने तोड़ा दम

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देश में जहाँ एक तरफ हाई-स्पीड इंटरनेट और डिजिटल तकनीकों का विस्तार हो रहा है, वहीं उत्तराखंड में रुड़की के खाड़ क्षेत्र के 9 गाँव आज भी मोबाइल नेटवर्क के लिए तरस रहे हैं। केंद्र सरकार की दूरसंचार परियोजना ‘4G सेचुरेशन योजना’ का मुख्य उद्देश्य देश के उन दूरदराज और सीमावर्ती क्षेत्रों तक मोबाइल कनेक्टिविटी पहुँचाना था जहाँ नेटवर्क बेहद कमजोर या पूरी तरह गायब है।

इसके तहत पुराने 2G-3G टावरों को 4G में अपग्रेड करने और नए टावर लगाने का काम होना था, लेकिन चिंताजनक बात यह है कि आजादी के इतने दशकों बाद भी खाड़ क्षेत्र के हलजौरा, बेलकी, इनायतपुर, इब्राहिमपुर मसाई कला, गोकुलवाला, डांडा, बनवाला, शाहमंसूर और दौड़बसी जैसे गाँवों तक सरकारी सिस्टम इंटरनेट जैसी बुनियादी सुविधा नहीं पहुँचा सका है।

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ग्राम प्रधानों द्वारा जिला प्रशासन, डीएम और एसडीएम स्तर पर कई बार पत्र सौंपकर मोबाइल टावर लगाने की गुहार लगाई जा चुकी है, लेकिन अब तक धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। नेटवर्क न होने से इन गाँवों के लोग बेहद गंभीर और चुनौतीपूर्ण परेशानियों का सामना कर रहे हैं।

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आपातकालीन स्थिति जैसे दुर्घटना या बीमारी के समय ग्रामीण किसी डॉक्टर या एम्बुलेंस से संपर्क नहीं कर पाते हैं। बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित हो चुकी है और युवा सरकारी योजनाओं के ऑनलाइन पोर्टल या मोबाइल ऐप्स के लाभ से पूरी तरह वंचित हैं।

डिजिटल दौर में नेटवर्क न होने के कारण UPI भुगतान, बैंकिंग लेनदेन, किसानों को मौसम और फसल बीमा की जानकारी मिलना, तथा आधार, पेंशन, राशन और आयुष्मान कार्ड जैसी बेहद जरूरी ऑनलाइन सेवाएं पूरी तरह ठप पड़ी हैं। कई जगहों पर अगर थोड़ा-बहुत नेटवर्क आता भी है, तो लोगों को छत या ऊँचे स्थानों पर चढ़कर फोन पर बात करनी पड़ती है।

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जूनियर टेलीकॉम ऑफिसर के अनुसार, एक मोबाइल टावर स्थापित करने में करीब २० लाख रुपये का खर्च आता है और उच्चाधिकारियों को इसकी रिपोर्ट भेजी जा चुकी है। स्थानीय ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि इस गंभीर समस्या का जल्द समाधान कर उन्हें डिजिटल दुनिया से जोड़ा जाए।

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