यमुनोत्री धाम में स्वच्छता तार-तार, पैदल मार्ग पर लगा कूड़े का अंबार, सीधे यमुना नदी में गिर रहा कचरा

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उत्तराखंड की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा के तहत इन दिनों यमुनोत्री धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। प्रतिदिन हजारों की संख्या में तीर्थयात्री दर्शन के लिए पहुँच रहे हैं, लेकिन बढ़ती भीड़ के साथ ही धाम क्षेत्र में कचरे की समस्या बेहद विकराल हो गई है।

जानकीचट्टी से यमुनोत्री धाम तक के करीब छह किलोमीटर लंबे पैदल मार्ग और मुख्य मंदिर परिसर में जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। यात्रा सीजन के दौरान प्रतिदिन बड़ी मात्रा में प्लास्टिक की बोतलें, खाद्य सामग्री के रैपर, डिस्पोजल सामग्री, खाली पैकेट और अन्य ठोस अपशिष्ट निकल रहे हैं।

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हैरानी की बात यह है कि इस भारी मात्रा में जमा हो रहे कचरे के वैज्ञानिक और स्थायी निस्तारण के लिए प्रशासन की ओर से कोई ठोस व्यवस्था नजर नहीं आ रही है, जिससे क्षेत्र की स्वच्छता व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय निवासियों और तीर्थ पुरोहितों ने इस अव्यवस्था पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि पैदल मार्ग के किनारे जमा यह टन कचरा तेज हवा या बारिश के साथ सीधे नीचे बह रही यमुना नदी में समा रहा है।

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यमुनोत्री धाम के घोड़ा पड़ाव से लेकर मुख्य मंदिर परिसर तक के करीब आधा किलोमीटर के दायरे में भी भारी गंदगी देखी जा सकती है। यहाँ तक कि नदी के किनारों और जलधारा के बीच श्रद्धालुओं द्वारा छोड़े गए कपड़ों और प्लास्टिक का अंबार लगा हुआ है, जिससे नदी का पवित्र जल भी प्रदूषित हो रहा है।

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प्रशासन द्वारा हर साल यात्रा शुरू होने से पहले स्वच्छता के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर सुचारू कूड़ा प्रबंधन और समय पर सफाई न होने से पवित्र धाम की छवि प्रभावित हो रही है। पर्यावरण प्रेमियों ने सरकार से मांग की है कि इस संवेदनशील पारिस्थितिकी क्षेत्र को बचाने के लिए तुरंत प्रभावी कदम उठाए जाएं।

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