उत्तराखंड में मतदाता सूची को पूरी तरह पारदर्शी, सटीक और त्रुटिहीन बनाने के लिए निर्वाचन आयोग ने सोमवार से एक विशेष ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ अभियान की शुरुआत कर दी है। इस महाअभियान के तहत यदि मौजूदा मतदाता सूची में शामिल किसी भी व्यक्ति का नाम, स्पेलिंग या अन्य विवरण वर्ष 2003 की मूल मतदाता सूची के डेटाबेस से थोड़ा भी भिन्न पाया गया, तो उसका नाम वोटर लिस्ट से काटा जा सकता है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अनुसार, इस बार गड़बड़ियों को पकड़ने और सूचियों के मिलान के लिए बेहद सख्त मानक तय किए गए हैं। यदि मौजूदा डेटाबेस की जानकारी पिछले एसआईआर डेटाबेस या 2003 की मूल सूची से मेल नहीं खाती है, तो निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी की ओर से संबंधित मतदाता को एक औपचारिक नोटिस भेजा जाएगा।
नोटिस मिलने के बाद मतदाता को खुद यह साबित करना होगा कि दोनों रिकॉर्ड में दर्ज नाम एक ही व्यक्ति के हैं। यदि कोई मतदाता नोटिस की उपेक्षा करता है या तय समय में जवाब नहीं देता, तो उसका वोट तुरंत काट दिया जाएगा।
अभियान के पहले ही दिन इस प्रक्रिया को गति देते हुए देहरादून सचिवालय में मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को और नैनीताल के लोकभवन में कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत ने राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) को विधिवत गणना फॉर्म सौंपा।
सोमवार शाम चार बजे तक राज्यभर में 55,269 गणना फॉर्म बांटे जा चुके हैं। इस अभियान के तहत कई प्रकार की विसंगतियों को चिन्हित किया गया है; जैसे वर्ष 2003 और वर्तमान सूची में नाम या उपनाम की स्पेलिंग बदलना, पुराने नाम में अचानक नया शब्द जुड़ जाना, या फिर छह अलग-अलग मतदाताओं का नाम किसी एक ही व्यक्ति के मकान नंबर से संबद्ध पाया जाना।
इसके अलावा, यदि मतदाता और उसके पिता की उम्र में 15 वर्ष या उससे कम का अंतर है, दादा और पोते की उम्र में 40 वर्ष से कम का अंतर है, या दो सगे भाई-बहनों की उम्र में 9 महीने से कम का अंतर दर्ज है, तो ऐसे सभी संदिग्ध मामलों में तुरंत नोटिस जारी किए जाएंगे। ‘
बूथ लेवल ऑफिसर को सीधे नाम बदलने का अधिकार नहीं होगा, बल्कि मतदाताओं को खुद सही दस्तावेज जुटाकर एसडीएम दफ्तर में अपनी त्रुटियों को सुधरवाना होगा। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे इस शुद्धिकरण अभियान में बीएलओ का सहयोग करें और पासपोर्ट साइज फोटो के साथ गणना फॉर्म भरकर सौंपें ताकि कोई भी वैध मतदाता अपने लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित न रहे।

