फर्जी दस्तावेज से हड़पी अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति, दून कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के प्रबंधन पर FIR

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छात्रवृत्ति घोटाला उत्तराखंड के दामन पर विक्रम के कांधे पर लटके वेताल की तरह हो गया है। जो भी सरकार आ रही है छात्रवृत्ति के वेताल को निजी इंस्टीट्यूट उसके कांधे पर लटका दे रहे हैं। आलम ये है कि निजी इंस्टीट्यूट्स की करतूत का खामियाजा सरकारों को भुगतना पड़ रहा है। जनता के बीच सरकार की इमेज पर सवाल उठ रहे हैं।

उत्तराखंड की अस्थाई राजधानी देहरादून में अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति योजनाओं में एक बड़ा घोटाला फिर सामने आया है। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी की तहरीर पर प्रेमनगर थाने में दून कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के प्रबंधन के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है।

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कॉलेज प्रबंधन पर फर्जी और संदिग्ध दस्तावेजों के जरिए छात्रवृत्ति हड़पने के प्रयास का आरोप लगा है। मामला साल 2021-22 और 2022-23 में संचालित अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति योजनाओं से जुड़ा हुआ है। मामले का तब पता चला जब भारत सरकार की ओर से किए गए डेटा विश्लेषण और सत्यापन किया गया। सत्यापन में पता चला कि आलम दीपक तले अंधेरे का है।

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जिन शैक्षिण संस्थानों के कांधे पर छात्रों को ईमानदार और काबिल नागरिक बनाने की जिम्मेदारी है उनका खुद का चरित्र ही काजल की कोठरी है। लिहाजा देशभर के कई शैक्षणिक संस्थानो ने जरूरतमंद छात्रों की छात्रवृत्ति को कमाई का जरिया बनाने की नापाक कोशिश की।

संदेह के घेरे में आए उत्तराखंड में भी कुछ संस्थानों को चिह्नित किया गया। शासन के निर्देश के बाद अधिकारियों ने जांच पड़ताल शुरू कर दी। जिले के 34 शैक्षणिक संस्थानों की जांच रिपोर्ट में पाया गया कि छात्रवृत्ति प्राप्त करने वाले सभी छात्र उत्तराखंड के बाहर के राज्यों से संबंधित थे।

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आवेदनों के सत्यापन से जुड़े अधिकारियों की जानकारी भी बाहरी राज्यों से जुड़ी पाई गई। भारत सरकार की मानक संचालन प्रक्रिया के तहत ऐसे मामलों में संबंधित संस्थानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराना जरूरी है। आगे की जांच अब एसआईटी करेगी।

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