दून अस्पताल में आयुष्मान घोटाला, दूसरे के कार्ड पर लगवा लिए 3 स्टंट

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देहरादून के प्रतिष्ठित दून अस्पताल में आयुष्मान योजना के तहत एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने अपनी कार्यप्रणाली में भारी बदलाव करते हुए नियमों को बेहद सख्त कर दिया है। अब इस जनकल्याणकारी योजना का अनुचित लाभ उठाने वाले धोखेबाजों पर लगाम कसने के लिए अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों के बेड पर लेटे हुए GPS युक्त फोटो को पूरी तरह से अनिवार्य कर दिया गया है।

गौरतलब है कि विगत दिनों मंजीत नाम के एक व्यक्ति के आयुष्मान कार्ड पर विक्की नामक दूसरे व्यक्ति को तीन स्टेंट लगा देने का एक गंभीर मामला उजागर हुआ था, जिससे अस्पताल प्रशासन और योजना की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए थे।

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इसी के जवाब में मंगलवार को दून अस्पताल प्रबंधन द्वारा आयुष्मान सोसाइटी को अपना स्पष्टीकरण और जवाब भेज दिया गया है, जिसमें बताया गया है कि दोषी आरोपी के खिलाफ संबंधित थाने में तहरीर दे दी गई है और उसने इलाज में खर्च हुई पूरी रकम भी राजकोश में वापस जमा करा दी है। इस फर्जीवाड़े से सबक लेते हुए अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आर.एस. बिष्ट ने मरीजों के सत्यापन और उनकी चौबीसों घंटे निगरानी के लिए नए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

नए नियमों के अनुसार, आयुष्मान मित्रों को निर्देशित किया गया है कि वे अब केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि इलाज के दौरान मरीज की भर्ती होने और डिस्चार्ज होने के समय जीपीएस वाली फोटो तो लेंगे ही, साथ ही हर तीसरे दिन भी मरीज के बेड पर जाकर उसकी लाइव फोटो खींचकर पोर्टल पर अपलोड करेंगे।

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इसके अलावा, आयुष्मान मित्र अब स्वयं रोजाना जनरल वार्डों और ICU में जाकर गंभीर मरीजों का बायोमेट्रिक सत्यापन भी सुनिश्चित करेंगे, ताकि किसी भी स्तर पर पहचान छुपाकर इलाज न किया जा सके। इस पूरी व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए आयुष्मान समन्वयक दिनेश रावत और बीएएफ के जिला को-ऑर्डिनेटर नितेश यादव को आयुष्मान मित्रों के काम की कड़ी मॉनीटरिंग करने और व्यवस्था को बेहतर बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

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सुरक्षा को और पुख्ता करने के लिए अब मरीज का असली आधार कार्ड दिखाना अनिवार्य कर दिया गया है, जिसे आयुष्मान मित्र हर मरीज की फाइल के साथ बाकायदा स्कैन करके रिकॉर्ड में सुरक्षित रखेंगे। इसके साथ ही, वार्ड में तैनात सिस्टर इंचार्ज की भी यह सीधी व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की गई है कि वे इलाज शुरू करने से पहले स्वयं मरीज का आधार कार्ड और आयुष्मान कार्ड देखकर उसके वास्तविक होने का पूरी तरह मिलान व सत्यापन करेंगी।

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