उत्तराखंड में जनगणना ड्यूटी को लेकर शिक्षकों का फूटा गुस्सा, कहा-पढ़ाई के साथ सर्वे असंभव,

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उत्तराखंड में जनगणना कार्य के लिए बड़ी संख्या में शिक्षकों और कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है, जिससे शिक्षा जगत में भारी रोष है। जनगणना निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि किसी भी कर्मचारी को उनके मूल विभाग से पूरी तरह कार्यमुक्त नहीं किया जाएगा, बल्कि उन्हें पढ़ाने के साथ-साथ जनगणना का कार्य भी करना होगा। शिक्षकों का कहना है कि इस “दोहरी ड्यूटी” की वजह से स्कूलों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, जबकि प्रशासन का तर्क है कि यह एक पार्ट-टाइम जिम्मेदारी है जिसे पढ़ाई के बाद पूरा किया जा सकता है।

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शिक्षकों का आक्रोश और दोहरी ड्यूटी की समस्या

शिक्षक संगठनों, विशेषकर जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया है। शिक्षकों का तर्क है कि स्कूल में पढ़ाने के बाद दोपहर 2 बजे से जनगणना के लिए 15 से 20 किलोमीटर दूर जाना व्यावहारिक नहीं है। कई प्राथमिक स्कूलों में सभी शिक्षकों की ड्यूटी लगा दी गई है, जिससे वैकल्पिक व्यवस्था न होने के कारण कई स्कूल बंद होने की कगार पर हैं। हरिद्वार और देहरादून में शिक्षकों ने इस फैसले के खिलाफ अधिकारियों का घेराव भी किया है।

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प्रशासनिक व्यवस्था और मानदेय

जनगणना निदेशक ईवा आशीष श्रीवास्तव के अनुसार, एक कर्मचारी को औसतन 180 घरों की गणना करनी है, जिसे 30 दिनों के भीतर पूरा किया जा सकता है। इस कार्य के लिए शिक्षकों और कर्मचारियों को अलग से मानदेय भी दिया जाएगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जनगणना एक अति-आवश्यक राष्ट्रीय कार्य है, जिसे शिक्षकों को पूरी जिम्मेदारी के साथ निभाना होगा।