देहरादून के जौलीग्रांट एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बड़ा बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। प्रोजेक्ट स्क्रीनिंग कमेटी (पीएससी) ने एयरपोर्ट विस्तार के लिए 49.6 हेक्टेयर वन भूमि के हस्तांतरण के प्रस्ताव को अपनी हरी झंडी दे दी है। अब इस प्रस्ताव को वन विभाग के माध्यम से केंद्र सरकार की अंतिम मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। केंद्र से अनुमति मिलते ही विस्तार का काम आधिकारिक रूप से शुरू हो जाएगा, जिससे क्षेत्र में हवाई सेवाओं और पर्यटन को नई मजबूती मिलेगी।
नए रनवे और बुनियादी ढांचे का निर्माण
एयरपोर्ट विस्तार प्रोजेक्ट के तहत मुख्य रूप से तीन बड़े काम किए जाने हैं। इसमें 33.90 हेक्टेयर भूमि का उपयोग विस्तार के लिए होगा, जबकि 8.59 हेक्टेयर में नई रनवे स्ट्रिप बनाई जाएगी। इसके अलावा, एयरपोर्ट तक पहुंच को आसान बनाने के लिए 7.20 हेक्टेयर में नई अप्रोच रोड का निर्माण भी प्रस्तावित है।
थानों रोड का हिस्सा भी आएगा जद में
विस्तार योजना के कारण वर्तमान थानों रोड का एक बड़ा हिस्सा एयरपोर्ट की सीमा के अंदर आ जाएगा। इसके समाधान के लिए वन विभाग या तो वहां अंडरग्राउंड सड़क बनाएगा या फिर एयरपोर्ट के किनारे से नई सड़क निकाली जाएगी। इसके लिए भी अतिरिक्त वन भूमि की आवश्यकता को ध्यान में रखा गया है।
वन्यजीव बोर्ड की मंजूरी और पर्यावरण पर प्रभाव
चूंकि प्रस्तावित भूमि शिवालिक एलीफेंट रिजर्व के अंतर्गत आती है, इसलिए इस प्रोजेक्ट के लिए राज्य और राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की अनुमति अनिवार्य होगी। ऑनलाइन क्लीयरेंस के बाद इसका प्रस्ताव जल्द ही बोर्ड को भेजा जाएगा।
9,300 से ज्यादा पेड़ों की होगी कटाई
विस्तार कार्य के चलते कुल 9,307 पेड़ों की कटाई की जानी है। इनमें खैर, शीशम, सागौन और अमलतास जैसी विभिन्न प्रजातियों के पेड़ शामिल हैं। वन विभाग के अनुसार, इनमें से लगभग 6,272 पेड़ छोटे और मध्यम आकार के हैं। पर्यावरण के नुकसान की भरपाई के लिए क्षतिपूरक वनीकरण और पेड़ों के ट्रांसलोकेशन जैसी शर्तों का पालन किया जाएगा।

