उत्तराखंड में गहराया जल संकट; जल स्रोतों में पानी घटने से 1060 क्षेत्र प्रभावित

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उत्तराखंड में गर्मी की शुरुआत के साथ ही पानी की किल्लत ने विकराल रूप ले लिया है। पेयजल एजेंसियों ने राज्य के 1060 क्षेत्रों को संभावित संकटग्रस्त घोषित किया है, जिनमें नैनीताल, देहरादून, पौड़ी, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। जल संस्थान की रिपोर्ट के अनुसार, 691 ग्रामीण बस्तियों और 369 शहरी मोहल्लों में पानी की भारी किल्लत हो सकती है। जल स्रोतों का स्तर गिरने के कारण जल संस्थान की चुनौतियां बढ़ गई हैं, जिससे निपटने के लिए प्रशासन ने मुस्तैदी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।

नैनीताल और पौड़ी में पेयजल संकट की गंभीर स्थिति

पेयजल संकट के मामले में नैनीताल सबसे आगे है, जहाँ 179 ग्रामीण और 77 शहरी मोहल्लों में पानी की किल्लत देखी जा रही है। वहीं, पौड़ी जिले के बिंजौली गांव में स्थिति इतनी खराब है कि ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। गांव के पास स्थित सार्वजनिक स्रोत भी सूखने के कगार पर हैं, जिससे लोगों को सुबह से शाम तक पानी के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है।

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खच्चरों से ढोकर घरों तक पहुंच रहा पानी

पिथौरागढ़ के गंगोलीहाट क्षेत्र में हालात बेहद चुनौतीपूर्ण हैं। यहाँ के बुंगली और कफल्ना जैसे गांवों में लोग तीन किलोमीटर दूर से खच्चरों पर पानी लदवाकर लाने को मजबूर हैं। पानी की कमी के कारण ग्रामीणों को ₹70 में मात्र 80 लीटर पानी खरीदना पड़ रहा है। चमोली जिले में भी 100 से अधिक पुराने जल स्रोत सूख चुके हैं, जिससे स्थानीय निवासियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

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जल स्रोतों में पानी कम होने से बंद हो रहे ट्यूबवेल

तापमान बढ़ने के कारण कई इलाकों में ट्यूबवेल और हैंडपंपों ने जवाब दे दिया है। नैनीताल के 235 पेयजल स्रोतों में पानी कम हो गया है, जबकि हल्द्वानी के गोला क्षेत्र में पिछले पांच सालों में दो ट्यूबवेल पूरी तरह बंद हो गए हैं। इस संकट से निपटने के लिए जल संस्थान ने नए टैंकर खरीदने और प्रभावित इलाकों में वैकल्पिक व्यवस्था करने की योजना बनाई है।

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देहरादून के जौनसार-बावर में पानी ढोने में बीत रहा समय

देहरादून के विकासनगर और जौनसार-बावर क्षेत्र के दर्जनों गांवों में पेयजल स्रोत सूख चुके हैं। सहिया क्षेत्र के अलसी और पंजिया गांव में ग्रामीण सुबह और शाम का पूरा समय सिर्फ पानी ढोने में बिता रहे हैं। मालदेवता के ऊपरी इलाकों में भी पानी की भारी किल्लत है, जिसके लिए जल निगम को युद्धस्तर पर तैयारी करने के निर्देश दिए गए हैं।

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