मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का हमला,महासचिव को सौंपा नया नोटिस

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विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने की मांग को लेकर राज्यसभा के महासचिव पीसी मोदी को एक नया नोटिस सौंपा है। इस नोटिस पर 73 विपक्षी सांसदों के हस्ताक्षर हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश के अनुसार, यह प्रस्ताव राष्ट्रपति को संबोधित है और इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इससे पहले भी विपक्ष ने इस तरह का नोटिस दिया था, जिसे दोनों सदनों में अस्वीकार कर दिया गया था, लेकिन अब नई घटनाओं के आधार पर इसे दोबारा पेश किया गया है।

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विपक्ष द्वारा लगाए गए 9 गंभीर आरोप

विपक्षी दलों ने ज्ञानेश कुमार पर कुल नौ आरोप लगाए हैं। इनमें सत्ताधारी दल के साथ अत्यधिक निकटता, आदर्श आचार संहिता के पालन में पक्षपातपूर्ण रवैया और विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान पारदर्शिता की कमी जैसे मुद्दे शामिल हैं। विपक्ष का दावा है कि उनके पास इन आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य हैं।

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पश्चिम बंगाल और केरल की घटनाओं का जिक्र

नोटिस में विशेष रूप से पश्चिम बंगाल और केरल की कुछ घटनाओं का हवाला दिया गया है। विपक्ष का आरोप है कि पश्चिम बंगाल में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए और शिकायतों के बावजूद आयोग ने जानबूझकर कोई कार्रवाई नहीं की। वहीं, केरल में एक दस्तावेज पर भाजपा की मुहर होने की घटना को विपक्ष ने चुनाव आयोग की सत्ताधारी दल के साथ मिलीभगत का प्रमाण बताया है।

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संवैधानिक प्रावधानों का हवाला

जयराम रमेश ने स्पष्ट किया कि सीईसी को हटाने की यह मांग संविधान के अनुच्छेद 324(5) और 124(4) के तहत की गई है। यह मांग 15 मार्च 2026 के बाद की कथित घटनाओं और ‘सिद्ध दुराचार’ पर आधारित है। विपक्ष का मानना है कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाना अनिवार्य है।

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