उत्तराखंड के पांच नगर निकायों में चुनाव की प्रक्रिया लंबे समय से अटकी हुई है, जिसका स्थानीय जनता को बेसब्री से इंतजार है। शहरी विकास विभाग ने परसीमन और अन्य सभी औपचारिकताओं को पूरा कर लिया है, और अब गेंद राज्य निर्वाचन आयोग के पाले में है। हालांकि, इन पांच में से दो निकायों का मामला अभी भी नैनीताल हाईकोर्ट में विचाराधीन है, जिसके कारण वहां चुनावी बिगुल बजने में देरी हो रही है। बाकी निकायों के लिए ओबीसी आरक्षण और परसीमन का काम शासन स्तर पर फाइनल हो चुका है।
नरेंद्रनगर और किच्छा में 2023 से लटका है चुनाव
नरेंद्रनगर और किच्छा नगर पालिका में चुनाव काफी समय से लंबित हैं। नरेंद्रनगर में परसीमन विवाद के चलते पिछले साल चुनाव नहीं हो पाए थे, लेकिन अब वहां परसीमन और ओबीसी आरक्षण सर्वे की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। वहीं, किच्छा नगर पालिका के विस्तार के दौरान सिरौली कलां, बंडिया और देवरिया जैसे क्षेत्रों को शामिल करने को लेकर उपजे विवाद और हाईकोर्ट की दखल के कारण मामला अटका हुआ है।
तीन नए निकायों में पहली बार होगा मतदान
प्रदेश सरकार द्वारा गठित तीन नए निकायों— सिरौली कलां, गढ़ी नेगी और पाटी में पहली बार चुनाव होने हैं। ऊधमसिंह नगर के गढ़ी नेगी और चंपावत के पाटी नगर पंचायत में परसीमन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और ये चुनाव के लिए तैयार हैं। इन नए निकायों के गठन से स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है, बस अब निर्वाचन आयोग द्वारा तारीखों के एलान की प्रतीक्षा है।
हाईकोर्ट में विचाराधीन है किच्छा-सिरौली कलां का मामला
सिरौली कलां को लेकर कानूनी पेच फंसा हुआ है। पहले इसे पालिका में शामिल किया गया, फिर अलग कर रेवेन्यू विलेज बनाने की कोशिश हुई, जिस पर स्थानीय निवासियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी। राज्य निर्वाचन आयुक्त सुशील कुमार के अनुसार, किच्छा और सिरौली कलां का मामला फिलहाल अदालत में है, इसलिए इन क्षेत्रों में चुनाव का भविष्य माननीय उच्च न्यायालय के अंतिम आदेश पर निर्भर करेगा।
तैयारियां पूरी, आयोग के फैसले का इंतजार
राज्य निर्वाचन आयोग का कहना है कि जहां कानूनी अड़चनें नहीं हैं, वहां विभाग की ओर से तैयारियां पुख्ता हैं। जैसे ही सरकार और कोर्ट की ओर से स्पष्ट निर्देश मिलते हैं, इन पांचों निकायों में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बहाल करने के लिए चुनाव आयोजित किए जाएंगे। इन निकायों में चुनाव होने से क्षेत्रीय समस्याओं के समाधान और स्थानीय प्रशासन को मजबूती मिलेगी।

