चमोली। उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित NTPC की निर्माणाधीन तपोवन विष्णुगाड़ जल विद्युत परियोजना की सुरंग में पानी और मलबे का रिसाव होने के कारण निर्माण कार्य पूरी तरह रोक दिया गया है। सुरक्षा के मद्देनजर एनटीपीसी प्रबंधन ने 15 अगस्त की सुबह टनल के ऊपरी हिस्से में कैविटी दिखने के बाद वहां कार्यरत तीन दर्जन से अधिक श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। इस घटना के बाद चमोली जिला प्रशासन ने एनटीपीसी से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
एनटीपीसी के जन संपर्क अधिकारी राजेंद्र सिंह जयाड़ा के अनुसार, तपोवन से हेलंग तक आने वाली मुख्य सुरंग की एडिट टनल में निर्माण कार्य के दौरान अचानक कैविटी दिखाई दी। इस छेद से निरंतर पानी और मलबा अंदर आ रहा है, जिसके कारण फिलहाल सुरंग के अंदर का सारा काम बंद कर दिया गया है। हालांकि, एनटीपीसी अधिकारियों का कहना है कि टनल निर्माण के दौरान इस तरह की कैविटी बनना एक सामान्य प्रक्रिया है।
दूसरी ओर, एनटीपीसी द्वारा सुरक्षा से जुड़े इस बड़े खतरे को सामान्य घटना बताए जाने पर स्थानीय निवासियों और कर्मचारियों में गहरा असंतोष है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार ने बताया कि जिला प्रशासन ने एनटीपीसी के अधिकारियों से पूरी जानकारी ली है और एहतियात के तौर पर फिलहाल कार्य बंद कराकर मजदूरों को सुरक्षित हटा दिया गया है।
यह तपोवन सुरंग वही स्थान है जो 7 फरवरी 2021 की भीषण जलप्रलय का मुख्य केंद्र रहा था। उस वक्त रौंठी ग्लेशियर टूटने से आई बाढ़ में ऋषिगंगा पावर प्रोजेक्ट तबाह हो गया था और तपोवन टनल में मलबा भरने से 206 से अधिक लोगों की जान चली गई थी। उस त्रासदी के बाद बंद पड़ा निर्माण कार्य हाल ही में दोबारा शुरू किया गया था।
वर्ष 2001 से निर्माणाधीन तपोवन विष्णुगाड़ जल विद्युत परियोजना का इतिहास विवादों और हादसों से भरा रहा है। दिसंबर 2009 में परियोजना की झडकुला टीबीएम टनल में अचानक प्राकृतिक जल स्रोत फूटने से 600 लीटर प्रति सेकेंड की रफ्तार से पानी का रिसाव शुरू हुआ था, जो आज भी जारी है और इसी हादसे के बाद से एनटीपीसी की करोड़ों रुपये की टनल बोरिंग मशीन झडकुला साइट पर टनल के अंदर ही फंसी हुई है।
इसके बाद सुरंग में लगातार पानी भरने और बढ़ती जटिलताओं के कारण वर्ष 2012 में निर्माण में जुटी L&T कंपनी ने काम छोड़ दिया था। अभी 2021 की भीषण आपदा के घाव भरे भी नहीं थे कि 15 अगस्त को टनल में नए रिसाव और कैविटी बनने की घटना सामने आई है, जिसने इस महत्वाकांक्षी हाइड्रो प्रोजेक्ट की सुरक्षा और तकनीकी मानकों पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

