देहरादून। ऋषिकेश-भानियावाला हाईवे के सात मोड़ क्षेत्र में प्रस्तावित 4,369 पेड़ों की कटाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट की केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति ने कड़ा रुख अपनाया है। समिति ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को सख्त निर्देश देते हुए संवेदनशील हिस्से में पेड़ों को बचाने के लिए एलिवेटेड रोड समेत सभी वैकल्पिक अलाइनमेंट तलाशने को कहा है।
सुप्रीम कोर्ट की अधिकार प्राप्त समिति ने NHAI को सात मोड़ क्षेत्र का विस्तृत अध्ययन कर जल्द से जल्द रिपोर्ट CEC के समक्ष प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं। यह महत्वपूर्ण निर्देश ‘ट्री ट्रस्ट ऑफ इंडिया’ की ओर से दाखिल याचिका पर हुई सुनवाई के बाद जारी किए गए हैं।
सुनवाई के दौरान पर्यावरण कार्यकर्ता डॉ. विजय पाल बघेल ने सात मोड़ क्षेत्र में हजारों पुराने पेड़ों के कटान से होने वाले भारी पर्यावरणीय नुकसान का मुद्दा उठाया। डॉ. बघेल ने दलील दी कि बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई से हाथियों का प्राकृतिक गलियारा गंभीर रूप से प्रभावित होगा।
उन्होंने हाईवे के मौजूदा अलाइनमेंट को रद्द कर संवेदनशील हिस्से में खंभों पर एलिवेटेड रोड बनाने या ऐसा विकल्प अपनाने का अनुरोध किया, जिससे पेड़ों का कटान शून्य या न्यूनतम हो। इसके साथ ही उन्होंने पेड़ों के प्रत्यारोपण की तकनीक पर सवाल उठाते हुए कहा कि बड़े पेड़ों के प्रत्यारोपण से अपेक्षित परिणाम नहीं मिल रहे हैं।
दूसरी ओर, NHAI ने सुप्रीम कोर्ट के 21 जुलाई और उत्तराखंड हाईकोर्ट के 18 मार्च के आदेशों का हवाला देते हुए अपना पक्ष रखा। मामले में वन विभाग के प्रतिनिधि ने भी समिति के सामने अपनी विभागीय रिपोर्ट पेश की। सभी पक्षों को सुनने के बाद CEC के सदस्य सचिव डॉ. सतीश सी. गरकोटी ने पेड़ों की सुरक्षा के लिए एलिवेटेड संरचना और नए अलाइनमेंट पर तुरंत अध्ययन रिपोर्ट तलब की है। मामले पर NHAI के परियोजना निदेशक सौरभ सिंह ने बताया कि फिलहाल उन्हें CEC के इस निर्देश की आधिकारिक प्रति प्राप्त होना बाकी है।

