उत्तराखंड: ज्योलीकोट में दूषित पानी मामले पर मुख्य सचिव सख्त, विभागाध्यक्षों पर सीधी कार्रवाई की चेतावनी

ख़बर शेयर करें

देहरादून। उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने नैनीताल जिले के ज्योलीकोट में दूषित पानी की आपूर्ति पर कड़ी नाराजगी जताई है। सचिवालय में अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करते हुए उन्होंने स्पष्ट हिदायत दी कि जनस्वास्थ्य और पानी की गुणवत्ता से जुड़े मामलों में कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। भविष्य में ऐसी चूक होने पर संबंधित विभागाध्यक्षों के खिलाफ सीधी सख्त दंडात्मक कार्रवाई होगी।

मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश में पटवारी, शिक्षक, ग्राम पंचायत अधिकारी और ट्यूबवेल ऑपरेटरों का बड़ा नेटवर्क मौजूद है। इसके बावजूद ज्योलीकोट में गंदे पानी की खबर समय पर न मिलना गंभीर विषय है। उन्होंने निर्देश दिया कि इस पूरे फील्ड स्टाफ को सक्रिय कर एक मजबूत फीडबैक सिस्टम बनाया जाए, ताकि पानी या स्वास्थ्य संबंधी किसी भी गड़बड़ी की सूचना तुरंत शासन तक पहुंच सके।

यह भी पढ़ें -  सीएम धामी का चला चाबुक...चोरी के माल में हिस्सेदारी का आरोप, आबकारी विभाग के उपनिरीक्षक,सिपाही समेत कर्मचारी निलंबित…हुई गिरफ्तारी..

पेज्वल व्यवस्था को सुधारने के लिए मुख्य सचिव ने अगले 15 दिनों के भीतर प्रदेशभर की सभी प्रमुख पेयजल योजनाओं का भौतिक सत्यापन करने का आदेश दिया है। इस दौरान पानी के स्रोतों, स्टोरेज टैंकों, पाइपलाइनों और सीवर क्रॉसिंग पर लीकेज की गहन जांच की जाएगी। साथ ही पानी के क्लोरीनेशन और टैंकों की नियमित सफाई का रिकॉर्ड रखना भी अनिवार्य कर दिया गया है।

मुख्य सचिव ने पूरे राज्य की वाटर सप्लाई स्कीम्स की जीआईएस मैपिंग कराने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि पानी और सीवर लाइनों के क्रॉसिंग प्वाइंट्स पर विशेष नजर रखी जाए और जहां पुराने पाइप हैं, उन्हें तुरंत बदला जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि इंदौर की घटना के बाद जारी की गई एसओपी का कड़ाई से पालन होना चाहिए।

यह भी पढ़ें -  उत्तराखंड रोडवेज: बसों में मुफ्त सफर का ऐलान जीओ में फंसा, रोज हो रहा विवाद

बैठक में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिए गए कि वे राज्य के सभी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का औचक निरीक्षण करें और प्रमुख शहरों में नियमित रूप से पानी की टेस्टिंग सुनिश्चित करें। इसके साथ ही जिला स्तरीय समितियों को केवल औपचारिकता निभाने के बजाय धरातल पर उतरकर समीक्षा करने के निर्देश दिए गए।

स्वास्थ्य विभाग को निर्देशित करते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि जहां भी दूषित पानी की शिकायत मिले, वहां तुरंत डॉक्टरों की विशेष टीम भेजी जाए। सीएमओ और सीएमएस स्तर की व्यवस्थाओं को अलर्ट रखते हुए अगले 15 दिनों में पूरे प्रदेश में सघन स्वास्थ्य सर्विलांस चलाया जाए।

यह भी पढ़ें -  उत्तराखंड: नैनीताल दूषित पेयजल मामले पर CM धामी का बड़ा एक्शन, 6 अधिकारी निलंबित

नेटवर्क की कमियों को दूर करने के लिए मुख्य सचिव ने रिटायर्ड लाइनमैनों और अनुभवी पूर्व कर्मियों की सेवाएं लेने की बात कही। उन्होंने कहा कि उनके जमीनी अनुभव से पुरानी पाइपलाइनों, सीवर क्रॉसिंगों और संवेदनशील स्थलों को चिन्हित कर दुरुस्त किया जाए।

इस समीक्षा बैठक में सचिव डॉ. रणवीर सिंह चौहान, डॉ. वी. षणमुगम, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते और जल संस्थान के मुख्य महाप्रबंधक डी.के. सिंह मौजूद रहे। वहीं नैनीताल के जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े।