शराब दुकानों के आवंटन में न्यायिक दखल से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, याचिका खारिज

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देहरादून। सर्वे चौक और आरटीआई शराब की दुकानों के आवंटन का मामला जिस तेजी के साथ सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था, उसी तेजी से अब इस मामले पर कारोबारी पक्ष को झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में दखल देने से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने साफ किया कि शराब की दुकानों का आवंटन सरकार के नीतिगत और प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र का विषय है।

मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने माना कि यदि सरकार राजस्व हित को ध्यान में रखते हुए शराब दुकानों के आवंटन को लेकर कोई निर्णय लेती है, तो महज इस आधार पर उसमें न्यायिक हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। यानी दुकान कहां आवंटित होगी, किस प्रक्रिया के तहत होगी और उससे राज्य को कितना राजस्व प्राप्त होगा, इन तमाम पहलुओं पर फैसला लेने का अधिकार सरकार के पास है।

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सर्वे चौक और आरटीओ स्थित शराब दुकानों को लेकर शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया था। कारोबारी पक्ष की ओर से आवंटन प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सरकार की प्रक्रिया को फिलहाल न्यायिक स्तर पर बड़ी राहत मिली है।

वहीं शास्त्री नगर शराब दुकान के मामले में भी शराब कारोबारी को हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। हाईकोर्ट ने सरकार और आबकारी विभाग द्वारा अपनाई जा रही प्रक्रिया को सही ठहराया है। ऐसे में लगातार सामने आ रहे इन मामलों में सरकार की आबकारी नीति और राजस्व हित को न्यायिक समर्थन मिलता दिखाई दे रहा है।

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खास बात यह है कि शराब दुकानों के आवंटन को लेकर प्रदेश में कारोबारी हित और सरकारी राजस्व के बीच चल रही कानूनी जंग अब अदालतों के फैसलों से नई दिशा ले रही है। सुप्रीम कोर्ट का ताजा फैसला सरकार के लिए इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि इससे दुकानों के आवंटन को लेकर सरकार के नीतिगत अधिकार को मजबूती मिली है।