रुद्रपुर। उत्तराखंड के किच्छा स्थित सूरजमल विश्वविद्यालय कॉलेज ऑफ नर्सिंग में चल रही गंभीर धांधलियों पर शासन ने कड़ा रुख अपनाया है। छात्रों के उग्र आंदोलन के बाद हरकत में आए शासन ने संस्थान में आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए नए एडमिशन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। इसके साथ ही कॉलेज प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी कर 7 दिनों के भीतर जवाब तलब किया गया है।
चिकित्सा शिक्षा विभाग को भेजे पत्र में शासन के उप सचिव कृष्ण कुमार शुक्ल ने बताया कि जिलाधिकारी की संयुक्त जांच रिपोर्ट में संस्थान के भीतर कई गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई हैं। जांच में सामने आया कि कॉलेज प्रबंधन ने भारतीय नर्सिंग परिषद की अनिवार्य मान्यता प्राप्त किए बिना ही छात्र-छात्राओं को प्रवेश दे दिया था, जिससे उनके भविष्य पर सीधा खतरा मंडरा रहा था।
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, कॉलेज प्रशासन ने छात्रों और अभिभावकों के साथ 17 फरवरी और 18 जून को किए गए लिखित समझौतों का भी पालन नहीं किया। इसके अलावा, शासन और विधिक समिति द्वारा मांगे जाने के बाद भी संस्थान भूमि स्वामित्व, स्वीकृत नक्शा, फायर एनओसी और ट्रस्ट डीड जैसे अनिवार्य दस्तावेज जमा कराने में पूरी तरह नाकाम रहा।
जांच में यह बात भी साफ हुई है कि कॉलेज ने वर्ष 2022 के शासकीय आदेशों और अनिवार्य आवश्यकता प्रमाण-पत्र की शर्तों की धज्जियां उड़ाई हैं। आईएनसी के मानकों का खुला उल्लंघन करने पर प्रशासन ने अब संस्थान के खिलाफ सख्त रुख अख्तियार किया है।
मामले की पुष्टि करते हुए एडीएम पंकज उपाध्याय ने बताया कि मानकों के उल्लंघन को देखते हुए कॉलेज के पक्ष में जारी अनिवार्य आवश्यकता प्रमाण-पत्र को निरस्त करने की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। उन्होंने साफ किया कि आगामी सत्र में किसी भी नए विद्यार्थी का दाखिला नहीं होने दिया जाएगा।

