देहरादून। देशभर में यातायात नियमों की अनदेखी और ई-चालान की बकाया रकम जमा न करने वालों पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सख्त सुझाव दिया है कि चालान न भरने वाले वाहन चालकों के घर की बिजली काट दी जाए या इसे बिजली के बिल से जोड़कर वसूला जाए। न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि केवल ई-चालान जारी करना काफी नहीं है, बल्कि जुर्माने की वसूली सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में देशभर में ई-चालान का लगभग 20 हजार करोड़ रुपये का बकाया लंबित पड़ा है और वाहन चालक इसे जमा नहीं कर रहे हैं। पीठ ने अधिकारियों को रैंडम चेकिंग करने और बकाया ई-चालान वाले वाहनों को मौके पर ही जब्त करने व ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही ऐसे वाहनों के मालिकाना हक को रोकने का भी सुझाव दिया गया है।
एक अन्य मामले में सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने डॉक्टरों पर हमले को लेकर कड़ा संदेश दिया है। ठाणे के अस्पताल में डॉक्टरों से मारपीट के आरोपी शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे की जमानत रद्द करते हुए कोर्ट ने उन्हें 3 दिन में आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया। पीठ ने स्पष्ट कहा कि मरीजों की सेवा करने वाले डॉक्टरों पर हमला कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेन-देन पर शुल्क लगाने के निर्णय पर केंद्र सरकार, आरबीआई और एनपीसीआई को नोटिस जारी किया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सरकार से पूछा है कि यूपीआई भुगतानों पर शुल्क लगाने का आधार क्या है। साथ ही कोर्ट 2005 के सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ मामले में 22 आरोपियों को बरी किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर भी सुनवाई करने को तैयार हो गया है।

