गैरसैंण में 2 दिवसीय सत्र को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने

ख़बर शेयर करें

उत्तराखंड में 27 और 28 अक्टूबर को गैरसैंण के भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में होने वाले विधानसभा सत्र को लेकर सियासत तेज हो गई है। दो दिवसीय सत्र में अनुपूरक बजट पेश किया जाएगा, लेकिन सत्र की अवधि को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं।

देहरादून से सरकारी अमला 48 घंटे के लिए ताम-झाम फाइल पेनड्राइव लेकर गैरसैंण पंहुचेगा.। सरकार पहुंचेगी और विपक्ष भी पहुंचेगा। हिफाजत के लिए पुलिस और प्रशासनिक मशीनरी भी मुस्तैद रहेगी। सरकारी हिसाब से तो गैरसैंण में होने वाला विधानसभा सत्र बेहद अहम माना जा रहा है।

सत्ता पक्ष के विधायक और भाजपा प्रवक्ता विनोद चमोली गैरसैंण में होने वाले सत्र को महत्वपूर्ण करार दे रहे हैं। उनकी माने तो प्रश्न लगाने की प्रक्रिया चल रही है। चमोली कहते हैं सदन में सवालों के जवाब के साथ विभिन्न मुद्दों पर चर्चा भी होगी।वहीं उन्होंने जानकारी दी कि इस सत्र में अनुपूरक बजट भी पेश होना है। ऐसे में शीतकालीन राजधानी गैरसैंण में होने वाले विधानसभा सत्र में विधायक अपनी बात रखेंगे। माना जा रहा है कि धामी सरकार के इस मौजूदा कार्यकाल का यह अंतिम विधानसभा सत्र हो सकता है, इसलिए ये काफी अहम है।

यह भी पढ़ें -  अंकिता भंडारी हत्याकांड: उत्तराखंड महिला मंच का गांधी पार्क के बाहर उग्र प्रदर्शन, VVIP एंगल पर CBI जांच की मांग तेज

सत्ता पक्ष जहां सूबे की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में होने वाले विधानसभा सत्र को काफी अहम करार दे रहा है वहीं कांग्रेस सत्र की समयवधि को लेकर मुखर है। कांग्रेस विधायक और उप नेता प्रतिपक्ष भुवन चंद्र कापड़ी ने महज दो दिन के विधानसभा सत्र पर सवाल उठाए हैं।

यह भी पढ़ें -  सितारगंज में PWD ने 78 लाख में सड़क बनाई, ढाई महीने भी चल नहीं पाई!

कापड़ी ने कहा, प्रदेश के कई संवेदनशील मुद्दे हैं जिनमें चर्चा होनी चाहिए ताकि नीति निर्माण हो सके । लेकिन सत्र के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया जा रहा। कापड़ी ने कहा सरकार का मकसद सिर्फ अनुपूरक बजट पारित कराना है।कापड़ी ने सरकार पर तोहमत लगाते हुए कहा सरकार जनहित के मुद्दों पर चर्चा को प्राथमिकता नहीं दी जा रही।

यह भी पढ़ें -  उत्तराखंड: महिला सिपाहियों के 1474 नए पदों को CM धामी ने दी मंजूरी, पदोन्नति का रास्ता भी हुआ साफ

कापड़ी ने दूसरे राज्यों में चलने वाले विधानसभा सत्रों का हवाला देते हुए कहा कि देश के दूसरे राज्यों में सालाना औसतन 25 से 30 दिन सदन चलता है, लेकिन उत्तराखंड में ये औसत तकरीबन 8 दिन का बैठता है। विपक्ष का सवाल तो वाजिब हैे लेकिन असल बात तो ये है कि विधानसभा सत्र कम दिन का चलना उत्तराखंड में परंम्परा सी बन गई है। खास कर पहाड़ी राज्य की पहाड़ी राजधानी गैरसैण की ठंडी और हसीन वादियों मेंं सियासत को ज्यादा दिन टिकना रास नहीं आता।