दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस वे से जगी “कंडी मार्ग” की आस..!

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उत्तराखंड राज्य बने तो पच्चीस साल पूरे हो गए लेकिन आज तक उत्तराखंड के गढ़वाल और कुमांऊ सीधे-सीधे सड़क के जरिए आपस में नही मिल पाए। गढ़वाल से कुमांऊ जाना हो तो उत्तरप्रदेश से गुजरना ही होगा। लेकिन अगर पौड़ी जिले के कोटद्वार से रामनगर जाने वाले पुराने कंडी मार्ग को चकाचक सड़क बना दिया जाए तो गढ़वाल-कुमांऊ के बीच का फासला मिट सकता है। इसके लिए कई बार मांग भी हुई आश्वसन भी मिला कंडी मार्ग चुनावी मुद्दा भी बना लेकिन हुआ कुछ नहीं। ये दूर की कौड़ी ही बनी रही।

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बहरहाल दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस के उद्घाटन के बाद उम्मीद जग रही है कि शायद कंडी मार्ग पर भी सरकार की नजरेंइनायत हो जाएं और उत्तराखंड को मोदी-धामी राज में एक बड़ी सौगात मिल जाए।

दरअसल कंडी मार्ग इतना टफ भी नहीं कि सरकार बना न पाए। बस पेंच है कार्बेट नेशनल पार्क के उस बड़े हिस्से का जो कोटद्वार से रामनगर के बीच आता है। हालांकि पहले लोग इस रास्ते का इस्तमाल करते थे, लेकिन जंगली जानवरों की जीवन शैली में खलल न पड़े इसके चलते इस रास्ते के सफर पर अब बंदिश है। लेकिन दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस वे पर बनी12 किलोमीटर लंबी एलीवेटेड सड़क ने कंडी मार्ग के लिए राह सुझाई है।

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उम्मीद है कि अगर पहल हुई तो कंडी मार्ग का ख्वाब भी साकार हो सकता है। भूतल परिवहन मंत्रालय दून-दिल्ली एक्सप्रेस वे की तर्ज पर टाइगर रिजर्व पार्क के बीच से गुजरने वाले हिस्से को एलीवेटेड सड़क बना सकती है। ताकि जंगल के जानवर जंगल के भीतर इंसान जंगल के ऊपर सुकून से सफर कर सकें।

हालांकि गढ़वाल को कुमांऊ से जोड़ने वाले कंडी मार्ग को एलीवेटड हिस्सा दून-दिल्ली एक्सप्रेस वे के मुकाबले लंबा होगा। लेकिन तय है कि, अगर जिमकार्बेट के ऊपर 40 किलोमीटर की एलीवेटेड रोड़ बनाने का रास्ता साफ हुआ तो गढ़वाल से कुमांऊ के बीच की दूरी घट जाएगी. महज 90 किलोमीटर का सफर कुमांऊ को गढ़वाल से जोड़ देगा और उत्तराखंडियों को उत्तरप्रदेश के शहर-बाजारों से भी नहीं गुजरना होगा।

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बहरहाल देखना ये दिलचस्प होगा कि जब धामी राज में मोदी मेहरबान हैं तो कंडी मार्ग पर रहमोकरम कब तक होता है।

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