राजाजी पार्क और फूलों की घाटी के ईको सेंसिटिव जोन पर मंथन, मुख्य सचिव ने दिए सख्त निर्देश

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देहरादून। प्रमुख सचिव पर्यावरण संरक्षण एवं जलवायु परिवर्तन आर.के. सुधांशु की अध्यक्षता में आज देहरादून स्थित सचिवालय में एक महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु राजाजी नेशनल पार्क और विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी राष्ट्रीय पार्क के प्रस्तावित ईको सेंसिटिव जोन से जुड़े महत्वपूर्ण नीतिगत मामलों का निस्तारण करना था। बैठक में दोनों उद्यानों के प्रस्तावित क्षेत्रफल, जोनल मास्टर प्लान, निगरानी समिति के गठन तथा जोन के भीतर प्रतिबंधित, विनियमित और अनुमत गतिविधियों की बारीक समीक्षा की गई।

बैठक के दौरान प्रमुख सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि ईको सेंसिटिव जोन के प्रस्तावों के हर पहलू का गहन परीक्षण कर आवश्यक प्रशासनिक व कानूनी कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। उन्होंने जोन के भीतर व्यावसायिक व अन्य गतिविधियों के निर्धारण के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के स्तर पर त्वरित कदम उठाने के आदेश दिए। इसके साथ ही संबंधित जिलों के जिलाधिकारियों से जल्द से जल्द वास्तविक रिपोर्ट प्राप्त कर ठोस प्रस्ताव तैयार करने को कहा।

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राजाजी नेशनल पार्क के प्रस्तावित ईको सेंसिटिव जोन के मामले में प्रमुख सचिव ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि इससे जुड़ी विभिन्न जटिलताओं के समाधान के लिए आगामी कैबिनेट बैठक में शासन का मार्गदर्शन प्राप्त किया जाएगा। इसके अलावा, उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के क्रम में विधिक राय लेकर राज्य सरकार की वर्तमान स्थिति के आधार पर एक सप्ताह के भीतर विस्तृत प्रतिउत्तर तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।

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विश्व धरोहर ‘फूलों की घाटी’ राष्ट्रीय पार्क की समीक्षा करते हुए प्रमुख सचिव ने पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने के लिए पर्यटकों की आवाजाही और क्षेत्र की वहन क्षमता का विशेष ध्यान रखने पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि पर्यटन विभाग और स्थानीय जिला प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर ऐसी रिपोर्ट तैयार की जाए, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचे बिना सतत पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सके।

प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु ने अंत में कहा कि उत्तराखंड की नाजुक भौगोलिक परिस्थितियों और पर्यावरणीय संवेदनशीलता को देखते हुए स्थानीय जनता की आवश्यकताओं की अनदेखी नहीं की जा सकती। ईको सेंसिटिव जोन के प्रस्ताव तैयार करते समय पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय जनभावनाओं के बीच एक आदर्श संतुलन कायम रखा जाएगा ताकि स्थानीय लोगों के रोजगार व दैनिक जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

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इस महत्वपूर्ण बैठक में सचिव वन सी. रविशंकर, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) नीना ग्रेवाल, मुख्य वन संरक्षक साकेत, नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व के निदेशक पंकज कुमार, केदारनाथ के डीएफओ रजत सुमन, अपर सचिव अभिषेक रुहेला और पर्यटन विभाग की अपर निदेशक पूनम चंद समेत कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।