Dehradun News: CM धामी ने ‘सशक्त बहना उत्सव’ में खरीदे स्थानीय उत्पाद, ‘वोकल फॉर लोकल’ का दिया संदेश

ख़बर शेयर करें

देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून स्थित राज्य सचिवालय में ‘सशक्त बहना उत्सव’ के तहत महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा लगाए गए स्टालों का निरीक्षण किया और स्थानीय उत्पादों की खरीदारी की। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से आगामी त्योहारों में स्वदेशी व स्थानीय सामान को प्राथमिकता देने और ‘वोकल फॉर लोकल’ संकल्प में भागीदार बनने का आह्वान किया।

May be an image of temple

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य की मातृशक्ति द्वारा स्वयं सहायता समूहों के जरिए तैयार किए जा रहे उत्पाद उत्तराखंड की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और हुनर की असली पहचान हैं। इन उत्पादों की खरीद से न केवल स्थानीय कारीगरों को बढ़ावा मिलता है, बल्कि महिलाओं की आजीविका मजबूत होती है और वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनती हैं।

यह भी पढ़ें -  मोदी और धामी की नीतियों से उत्तराखंड में बनेगी सरकार की हैट्रिक- बीजेपी का मेगा प्लान
May be an image of temple and text

त्योहारों के अवसर को रेखांकित करते हुए सीएम ने अपील की कि नागरिक पर्वों पर उपहार और दैनिक जरूरतों की खरीदारी में स्थानीय उत्पादों को पहली पसंद बनाएं। उन्होंने जोर देकर कहा कि स्थानीय स्तर पर निर्मित सामान की हर एक खरीद किसी न किसी ग्रामीण परिवार की आय बढ़ाती है और राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करती है।

यह भी पढ़ें -  दून STF का बड़ा एक्शन: कमला पैलेस के पास चल रहे फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, दो मैनेजर गिरफ्तार
May be an image of dais and text

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान ने देश में स्वदेशी उत्पादों के प्रति नया विश्वास जगाया है। राज्य सरकार महिला स्वयं सहायता समूहों, स्थानीय कारीगरों और छोटे उद्यमियों को बेहतर बाजार और मंच उपलब्ध कराने के लिए लगातार काम कर रही है।

यह भी पढ़ें -  उत्तराखंड: सर्दियों में बढ़ सकती है बिजली की किल्लत, ऊर्जा निगम ने शुरू की खास तैयारी

खबर के अंत में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों से इस त्योहारी सीजन में बढ़-चढ़कर स्थानीय उत्पाद खरीदने और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्वदेशी और स्थानीय उत्पादों को अपनाने से ही ‘आत्मनिर्भर उत्तराखंड’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ का सपना साकार होगा।