उत्तराखंड में ग्रीन सेस नियम में बदलाव की तैयारी, केवल EV वाहनों को मिलेगी छूट

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उत्तराखंड सरकार राज्य में पर्यावरण को सुरक्षित करने और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक बड़ा नीतिगत कदम उठाने जा रही है. इसके तहत उत्तराखंड में प्रवेश करने वाले सीएनजी और हाइब्रिड वाहनों को अब तक ग्रीन सेस में जो छूट मिल रही थी, उसे जल्द ही पूरी तरह समाप्त किया जा सकता है।

परिवहन मुख्यालय ने इस संबंध में अपनी संस्तुति देते हुए सरकार को एक नया प्रस्ताव भेज दिया है, जिस पर राज्य के वित्त विभाग ने भी अपनी सहमति दे दी है. इस संशोधित प्रस्ताव को जल्द ही कैबिनेट की बैठक में मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा और कैबिनेट की मुहर लगते ही इस नई व्यवस्था को पूरे राज्य में लागू कर दिया जाएगा।

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार का मानना है कि सीएनजी और हाइब्रिड वाहन पूरी तरह से प्रदूषण-मुक्त नहीं होते और ये शत-प्रतिशत इलेक्ट्रिक वाहनों की श्रेणी में नहीं आते हैं, इसलिए अब केवल शुद्ध इलेक्ट्रिक वाहनों को ही ग्रीन सेस की छूट का लाभ दिया जाना उचित है.

ग्रीन सेस की वर्तमान व्यवस्था और नए टैक्स की दरें

उत्तराखंड सरकार ने सबसे पहले 9 फरवरी 2024 से दूसरे राज्यों से आने वाले वाहनों पर ग्रीन सेस लागू करने की व्यवस्था शुरू की थी. शुरुआत में इस टैक्स की दरें 20 रुपये से लेकर 80 रुपये के बीच तय की गई थीं, लेकिन मई 2025 में पर्यावरण सुरक्षा के मद्देनजर इसे बढ़ाकर 80 रुपये से लेकर 700 रुपये तक कर दिया गया था।

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अब तक की व्यवस्था में दोपहिया वाहनों, केंद्र व राज्य सरकार की गाड़ियों, कृषि कार्यों से जुड़े ट्रैक्टर-ट्रेलर, रोड रोलर, एम्बुलेंस, दमकल और सेना के वाहनों के साथ-साथ इलेक्ट्रिक, सोलर, हाइब्रिड और सीएनजी वाहनों को भी इस टैक्स के दायरे से बाहर रखा गया था. हालांकि, नए नियमों के लागू होने के बाद सीएनजी और हाइब्रिड वाहनों से यह रियायत छीन ली जाएगी और उन्हें भी राज्य में प्रवेश करते समय निर्धारित ग्रीन सेस का भुगतान करना होगा।

परिवहन विभाग द्वारा नई ईवी नीति का मसौदा पेश

राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों के चलन और उनके बुनियादी ढांचे को तेजी से मजबूत करने के लिए परिवहन मुख्यालय ने एक नई ईवी नीति का मसौदा तैयार कर सरकार को सौंप दिया है. अपर परिवहन आयुक्त सनत कुमार सिंह के नेतृत्व में तैयार किए गए इस विशेष मसौदे में नए इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद, ई-चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना और इससे जुड़ी अन्य ढांचागत सुविधाओं के विकास के लिए विशेष सब्सिडी और आर्थिक प्रोत्साहन राशि देने की पुरजोर सिफारिश की गई है।

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वैश्विक पर्यावरण संकट को देखते हुए केवल ग्रीन रंग की नंबर प्लेट वाले शुद्ध इलेक्ट्रिक वाहनों को ही ग्रीन सेस से मुक्त रखने का निर्णय लिया गया है, क्योंकि इन नंबर प्लेटों के कारण राज्य की सीमाओं पर लगे ANPR कैमरों से वाहनों की पहचान करना बेहद आसान हो जाता है.

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