पिथौरागढ़। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के दो सगे भाइयों की रूस से सुरक्षित भारत वापसी हो गई है। सितारगंज की एक ट्रैवल एजेंसी के झांसे में आकर विदेश गए आनंद सिंह कार्की और भूपेंद्र सिंह कार्की करीब 97 दिनों तक रूस में बंधक जैसी स्थितियों में फंसे रहे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर विदेश मंत्रालय और मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास के कूटनीतिक हस्तक्षेप के बाद दोनों भाइयों को सकुशल रेस्क्यू कर भारत लाया गया। घर लौटने पर मुख्यमंत्री धामी ने फोन पर दोनों युवकों और उनके परिजनों से बात कर उनका हाल-चाल जाना।
पीड़ित परिवार के अनुसार, दोनों भाइयों को विदेश में बेहतर रोजगार का सपना दिखाकर सितारगंज की एक ट्रैवल एजेंसी ने ₹8 लाख ऐंठ लिए थे। इसके बाद 5 मई 2026 को दोनों भाइयों को भारत से मॉस्को भेज दिया गया, लेकिन वहां पहुंचते ही उनके साथ धोखाधड़ी शुरू हो गई।
मॉस्को पहुंचने पर दोनों युवकों को तय काम के बजाय उनकी इच्छा के विरुद्ध दूसरे कामों में झोंक दिया गया। आरोप है कि उन्हें कोई वेतन नहीं दिया गया, न ही कहीं बाहर जाने की आजादी थी। मना करने पर उन्हें लगातार डराया-धमकाया जाता था।
परिजनों की चिंता तब खौफ में बदल गई, जब अंतिम बातचीत में युवकों ने बताया कि जिस इमारत में उन्हें रखा गया है, उसके आसपास लगातार ड्रोन और मिसाइल हमले हो रहे हैं। इसके बाद परिजनों ने सरकार से मदद की गुहार लगाई।
मामले का संज्ञान लेते ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शासन के अधिकारियों को अलर्ट किया। राज्य सरकार ने तुरंत भारतीय विदेश मंत्रालय और मॉस्को दूतावास के साथ उच्चस्तरीय समन्वय स्थापित कर दोनों भाइयों को सुरक्षित निकालने का अभियान शुरू किया।
शासन-प्रशासन के कूटनीतिक प्रयासों से 97 दिनों के लंबे और भयानक इंतजार के बाद दोनों भाई सुरक्षित भारत पहुंचे। इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन में यूकेडी नेता काशी सिंह ऐरी और समाजसेवी रामदेव वर्मा ने भी पीड़ित परिवार और शासन के बीच समन्वय बनाने में सहयोग किया।
घटना पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि दुनिया के किसी भी कोने में संकट में फंसे उत्तराखंड के नागरिकों की सुरक्षा, सम्मान और हितों की रक्षा करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
97 दिनों के भयानक अनुभव के बाद बेटों को सही-सलामत देखकर परिजनों की आंखों में आंसू आ गए। पीड़ित परिवार ने त्वरित कार्रवाई और संवेदनशीलता के लिए मुख्यमंत्री धामी, विदेश मंत्रालय, भारतीय दूतावास और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया है।

