उत्तराखंड में शिकायतों का अंबार: CM धामी ने अफसरों को दी सख्त चेतावनी

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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून में सीएम हेल्पलाइन 1905 की समीक्षा के दौरान अधिकारियों के प्रति कड़ा रुख अपनाया है। समीक्षा में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि प्रदेश के विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने जनता की लगभग 22,246 शिकायतों को बिना किसी ठोस समाधान के जबरन बंद कर दिया। मुख्यमंत्री ने इसे जनता के विश्वास के साथ खिलवाड़ बताते हुए चेतावनी दी है कि जिन भी अधिकारियों ने जवाबदेही से बचने के लिए ऐसा किया है, उनके खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि भविष्य में बिना शिकायतकर्ता की संतुष्टि और उच्च अधिकारियों (DM या सचिव) की अनुमति के कोई भी शिकायत बंद नहीं की जाएगी।

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जल संस्थान और अन्य विभागों की बड़ी लापरवाही

रिपोर्ट के अनुसार, सबसे अधिक लापरवाही जल संस्थान में देखी गई, जहाँ मुख्य महाप्रबंधक ने पेयजल से जुड़ी 2,074 शिकायतों में से 2,043 (98.5%) को बिना हल किए ही बंद कर दिया। इसी तरह, बिजली के बिल, खराब मीटर, और राशन कार्ड जैसी गंभीर समस्याओं को भी तकनीकी उलझनों या सिर्फ ‘डिमांड’ मानकर फाइलों में दबा दिया गया। कई विभागों में तो शिकायतों को दूसरी श्रेणियों में बदलकर उन्हें रफा-दफा करने की कोशिश की गई है।

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लंबित शिकायतों का बढ़ता अंबार

आंकड़े बताते हैं कि साल 2021 से अब तक लगभग 6,287 शिकायतें 180 दिनों से अधिक समय से लंबित हैं। इसमें राजस्व विभाग, वन विभाग और लोक निर्माण विभाग सबसे ऊपर हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि पिछली तिमाही की तुलना में जनवरी-मार्च 2026 में लंबित शिकायतों में 107% और प्रक्रियाधीन शिकायतों में 2290% का भारी उछाल आया है, जो कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

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बेहतर प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों की सराहना

जहाँ एक ओर लापरवाही के लिए फटकार लगाई गई, वहीं सीएम ने उन अधिकारियों की सराहना भी की जिन्होंने शिकायतों का त्वरित और प्रभावी निस्तारण किया है। इनमें 99.09% समाधान दर के साथ उत्तरकाशी के मनोज गुसाईं और पौड़ी के अभिनव रावत (98.34%) जैसे अधिकारी शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे हर हफ्ते शिकायतों की समीक्षा करें ताकि जनता को समय पर न्याय मिल सके।

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