नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के पहले दिन नीट पेपर लीक, राम मंदिर चढ़ावा चोरी और सोनम वांगचुक के आंदोलन जैसे मुद्दों पर विपक्ष ने जबरदस्त हंगामा किया। विपक्षी सांसदों के तीखे तेवरों और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग के कारण लोकसभा 5 बार और राज्यसभा 6 बार स्थगित हुई।
सत्र की शुरुआत में लोकसभा में उत्तराखंड के पूर्व सीएम भुवन चंद्र खंडूरी समेत दिवंगत पूर्व सदस्यों को श्रद्धांजलि दी गई। इसके तुरंत बाद उत्तेजित विपक्षी सांसद वेल में आकर नारेबाजी करने लगे, जिससे उच्च सदन में वंदे मातरम से जुड़ा विधेयक भी पेश नहीं हो सका।
हंगामे के बीच ही कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या 34 से बढ़ाकर 38 करने से जुड़ा विधेयक पेश किया, जिसके लिए सरकार मई में अध्यादेश लाई थी। हालांकि, राज्यसभा में राष्ट्रीय गौरव के अपमान की रोकथाम बिल पेश नहीं हो पाया।
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने जंतर-मंतर पर पुलिस कार्रवाई को लोकतंत्र पर हमला बताया। उन्होंने कहा कि सरकार बलपूर्वक युवाओं की आवाज दबा रही है और शिक्षा व्यवस्था पर चर्चा कराने के बजाय बच्चों पर आंसू गैस के गोले दाग रही है।
लोकसभा में सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सरकार को घेरते हुए कहा कि यह कैसी सरकार है जो बच्चों की बात सुनने को तैयार नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि अपने हक की आवाज उठाने पर बच्चों को पीटा जा रहा है और उनकी समस्याओं की अनदेखी की जा रही है।
विपक्ष के लगातार जारी शोर-शराबे और वेल में प्रदर्शन के कारण सत्र के पहले दिन दोनों सदनों की कार्यवाही पूरी तरह बाधित रही। सरकार और विपक्ष के बीच इन ज्वलंत मुद्दों पर जारी गतिरोध के चलते अन्य विधायी कामकाज आगे नहीं बढ़ सका।

