अब जिला पंचायत नहीं, सिर्फ विकास प्राधिकरण पास करेंगे नक्शा, रेरा पोर्टल देगा ‘ओके’ रिपोर्ट

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उत्तराखंड के रियल एस्टेट सेक्टर में दशकों से चला आ रहा ‘नक्शा पास’ का अघोषित साम्राज्य अब इतिहास बनने जा रहा है। धामी सरकार सरकार के राज में आवास महकमे की ओर से ऐसे ब्रह्मास्त्र चलाने की पहल हो गई है। जिसका इंतजार हर आम घर खरीदार और ईमानदार बिल्डर को था।

राज्य के आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में इस ‘गेम चेंजर’ नीति पर मुहर लगी। जिसमें नक्शा स्वीकृति प्रक्रिया को सीधे रेरा पोर्टल से जोड़ने का फैसला लिया गया है ।अब आपके घर का नक्शा बाबुओं की टेबल पर नहीं, बल्कि एक क्लिक पर रेरा के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पास होगा।

माना जा रहा है कि इस फैसले को लेने की तीन बड़ी वजहें रही है। जिनमे बढ़ती हुई अवैध कॉलोनियों का मकड़जाल। देखा जाए तो देहरादून, हल्द्वानी, और हरिद्वार जैसे नगरों में मुनाफाखोर बिल्डरों ने अनियोजित तरीके से बिना नक्शा पास कराए ही सैैकडों कंकरीट के टावर और सैकड़ों कॉलोनियां काट दी गईं। जिसका खामियाजा आने वाले कल को भुगतना पड़ता है। मुनाफाखोर प्रोपर्टी डीलर अवैध कॉलोनी में न तो सीवर का पुख्ता इंतजाम करता है और, न सड़क,का बेहतर प्रबंधन करता है और न पार्क का ख्याल रखता है।सस्ते के चक्कर में खरीदने वाला फंस जाता है और, बिल्डर फरार।

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भवन हो या भूखंड का नक्शा रेरा पोर्टल से जोड़ने की दूसरी वजह मानी जा रही है प्राधिकरणों की मनमानी। भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क के नाम पर जनता को लूटा भी जाता रहा है। एक ही शहर में अलग-अलग रेट, अलग-अलग नियम। जिसके चलते जागरूक जनता परेशान थी। वहीं तीसरी बड़ी वजह लालफीताशाही आलम फाइल महीनों दबी रहती थी। आम आदमी का अपने घर का सपना सरकारी दफ्तरों के चक्कर में दम तोड़ देता था।

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लेकिन अब ऐसा नहीं होगा. आवास सचिव डॉ. राजेश कुमार ने साफ किया कि 2025 के संशोधित अधिनियम के तहत अब आवास विभाग के अधिसूचित क्षेत्रों में अब जिला पंचायतें नक्शा पास नहीं कर पाएंगी। अब यह अधिकार सिर्फ विकास प्राधिकरणों – MDDA, HRDA, SADA – के पास रहेगा।

वहीं डिजिटल होने से पारदर्शिता बढ़ेगी। हर नक्शे की फाइल रेरा पोर्टल पर अपलोड होगी। आवेदक घर बैठे देख सकेगा कि उसके नक्शे का अपडेट क्या है और उसकी फाइल कितने दिन में क्लियर होगी। इतना ही नहीं इस सिस्टम के लागू होने के बाद माना जा रहा है कि शुल्क में एकरूपता आएगी।

सचिव आवास डॉ. राजेश कुमार ने सभी प्राधिकरणों को एक हफ्ते में भू-उपयोग शुल्क घटाने का संशोधित प्रस्ताव देने के निर्देश दिए है। तय है कि जल्द ही पूरे प्रदेश में एक जैसा, तर्कसंगत शुल्क लगेगा। मतलब साफ है कि आम आदमी को ईमानदारी से घर बनाने में सरकारी स्तर पर पूरी मदद मिलेगी कोई अड़ंगा नहीं फंसेगा।

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तय है कि रेरा से पास नक्शा होने पर अपने घर का सपना आसानी से सकार हो सकेगा। बैंक लोन आसानी से मिल जाएगा तो भविष्य में अवैध बताकर बुलडोजर चलने का खतरा भी नहीं रहेगा। मतलब साफ है कि आदमी का प्रोपर्टी निवेश सिर्फ अप्रूव्ड कॉलोनी में ही होगा, धोखाधड़ी रुकेगी। वही जब हर नक्शे का डिजिटल रिकॉर्ड होगा, तो सरकार के पास शहरों की प्लानिंग का रियल टाइम डेटा भी मौजूद रहेगा

सचिव आवास डाक्टर राजेश कुमार ने साफ कर दिया है कि उत्तराखंड का रियल एस्टेट अब ‘जुगाड़’ से नहीं, ‘डेटा और डिजिटल’ से चलेगा। जिसका आगाज़ हो चुका है।

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