ये खबर हम सब उत्तराखंडियों के लिए किसी खुशखबरी से कम नहीं कि राज्य की सभी 27 पेयजल प्रयोगशालाओं को NABL यानी नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज से मान्यता प्राप्त हो गई है। तय है कि अब आपके घर के नल से आने वाले पानी की गुणवत्ता पर इंटरनेशनल लेवल की गारंटी मिलेगी।
NABL क्या है?
यह भारत सरकार की ऐसी संस्था है जो लैब को अंतरराष्ट्रीय मानकों ISO/IEC 17025 पर परखती है। इसकी मान्यता मिलने का मतलब है कि, यहां की जांच का रिपोर्ट कार्ड पूरी दुनिया में मान्य रहेगा। जिस शक की कोई गुंजाइश नहीं होगी। बहरहाल मौजूदा वक्त में पानी की जांच के लिए पूरे उत्तराखंड में 1 राज्य स्तरीय, 13 जनपदीय और 13 सबडिवीजन स्तर की प्रयोगशालाएं पानी की जांच-पड़ताल कर रही हैं।
जल संस्थान के सचिव मनीष सेमवाल ने बताया कि पिछले साल इन प्रयोगशालाओं में कुल 71,192 रासायनिक और जैविक नमूनों की जांच की गई। इन परीक्षणों से पानी में मौजूद अशुद्धियां, बैक्टीरिया और हानिकारक तत्वों की पहचान कर समय पर सुधार किया गया।
आम आदमी को क्या फायदा?
पानी जांच की प्रयोगशालाएं आम आदमी के लिए काफी अहम हैं। यहां पानी की जांच करवाकर अपने इलाके के पानी की क्वालिटी पता चल जाती है। जिसके चलते आबादी को पानी से होने वाली बीमारी से बचाया जा सकता है, जैसे डायरिया, पीलिया, टाइफाइड।
बहरहार राज्य की सभी जल जांच प्रयोगशालाओं को NABL की मान्याता मिलने के बाद अब कोई भी अपनी कॉलोनी के पानी की जांच की पुख्ता रिपोर्ट ले सकता है। ताकि उसे पता चल सके कि उसके नल का पानी पीने लायक है या नहीं,

