नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने नैनीताल में सुनवाई करते हुए देहरादून स्थित डोईवाला चीनी मिल में ऑयलमैन के नियमितीकरण मामले में मिल प्रबंधन को बड़ा झटका दिया है। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने एकलपीठ के फैसले को सही ठहराते हुए प्रबंधन की विशेष अपील खारिज कर दी।
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि एकलपीठ के आदेश में कोई अवैधानिकता नहीं है। अदालत ने टिप्पणी की कि एकलपीठ के निर्णय में हस्तक्षेप का कोई कानूनी आधार नहीं बनता, इसलिए मिल प्रबंधन की अपील निरस्त की जाती है।
सुनवाई के दौरान चीनी मिल प्रबंधन ने दलील दी कि संबंधित कर्मचारी ने वर्ष 2013 में हेल्पर का पद छोड़कर ऑयलमैन का पद स्वीकार किया था। प्रबंधन के मुताबिक ऑयलमैन का पद सीजनल होता है और केवल पेराई सत्र में काम लिया जाता है, इसलिए नियमितीकरण संभव नहीं है।
वहीं कर्मचारी की ओर से अदालत में पक्ष रखा गया कि उसकी मूल नियुक्ति वर्ष 1993 में हुई थी और वह पिछले 30 वर्षों से लगातार मिल में सेवाएं दे रहा है। कर्मचारी ने तर्क दिया कि उससे पहले कार्यरत ऑयलमैन को नियमित किया जा चुका है, इसलिए समानता के आधार पर उसे भी यह लाभ मिलना चाहिए।
मामले में 19 मई 2026 को हाईकोर्ट की एकलपीठ ने चीनी मिल प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश दिए थे। एकलपीठ ने आदेश दिया था कि अन्य दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की तरह इस कर्मचारी के नियमितीकरण पर भी नियमानुसार विचार किया जाए।
एकलपीठ के इस फैसले को चुनौती देते हुए डोईवाला चीनी मिल प्रबंधन ने खंडपीठ में विशेष अपील दायर की थी। हालांकि मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने प्रबंधन की सभी दलीलों को खारिज करते हुए एकलपीठ के आदेश को पूरी तरह बरकरार रखा। अदालत के इस अंतिम आदेश के बाद अब डोईवाला चीनी मिल प्रबंधन को संबंधित कर्मचारी को नियमित करने की दिशा में नियमानुसार निर्णय लेना होगा। इस फैसले से वर्षों से नियमितीकरण का इंतजार कर रहे कर्मचारियों में न्याय की उम्मीद जगी है।

