देहरादून। देहरादून जिले में लिंगानुपात में असमानता वाले गांवों को अब प्रशासन द्वारा ‘रेड जोन’ के रूप में चिह्नित किया जाएगा और इन इलाकों के अल्ट्रासाउंड केंद्रों की चौबीसों घंटे सघन निगरानी होगी। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने पीसीपीएनडीटी जिला सलाहकार समिति की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में यह कड़ा निर्णय लिया है। बैठक में जिले के भीतर पीसीपीएनडीटी अधिनियम के सख्त अनुपालन और गिरते लिंगानुपात में तत्काल सुधार लाने के उपायों पर विस्तृत मंथन किया गया।
जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली के वर्ष 2025-26 के हालिया आंकड़ों की समीक्षा की। उत्तराखंड के औसत लिंगानुपात 939 के मुकाबले देहरादून का आंकड़ा घटकर 927 पाए जाने पर उन्होंने सख्त नाराजगी और चिंता व्यक्त की है। स्वास्थ्य विभाग को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि सभी गांवों के पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों का गहन विश्लेषण कर असामान्य स्थिति वाले क्षेत्रों की तुरंत पहचान की जाए।
समीक्षा बैठक के दौरान 10 नए अल्ट्रासाउंड केंद्रों के पंजीकरण और 18 पुराने केंद्रों के नवीनीकरण के आवेदनों पर भी फैसला हुआ। जिलाधिकारी ने साफ कर दिया कि उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, एमडीडीए से अनापत्ति, फायर सेफ्टी और जैव चिकित्सा अपशिष्ट निस्तारण का एनओसी होना अनिवार्य है। सभी तय मानक पूरे होने पर ही नए केंद्र को अनुमति मिलेगी, अन्यथा अधूरा आवेदन तुरंत खारिज कर दिया जाएगा।
मामले की गंभीरता को साझा करते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज कुमार शर्मा ने बताया कि जनपद में वर्तमान में 218 क्रियाशील डायग्नोस्टिक केंद्र हैं, जिनमें 420 अल्ट्रासाउंड मशीनें काम कर रही हैं। जिला निरीक्षण समिति ने हाल ही में सितंबर महीने में 84 केंद्रों का औचक निरीक्षण किया, जबकि वर्ष 2026 में अब तक 117 केंद्रों की जांच की जा चुकी है। इस दौरान नियमों का उल्लंघन करने पर तीन केंद्रों की मशीनें मौके पर ही सील की गई हैं।
प्रशासन ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को जिले के सभी 218 संचालित केंद्रों की नियमित और औचक जांच के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही, कन्या भ्रूण हत्या पर पूरी तरह अंकुश लगाने के लिए गर्भवती महिलाओं की डिजिटल ट्रैकिंग सुनिश्चित की जाएगी। जिला प्रशासन ने साफ चेतावनी दी है कि लिंग जांच जैसी अवैध गतिविधियों में लिप्त पाए जाने वाले डॉक्टरों व सेंटरों के खिलाफ सख्त दंडात्मक व कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

