उत्तराखंड के लाल ने कर दिया कमाल…

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उत्तराखंड के लाल यूं तो कई क्षेत्रों में सूबे का नाम रोशन करते हैं लेकिन अब की दफे मेडिकल चिकित्सा के क्षेत्र में नाम कमाया है। पिछले 15 साल की मेहनत ने रंग दिखाया है। सूबे के बेटे ने जो 2 शोध पत्र तैयार किए हैं,उनका डंका सात समुन्दर पार बज रहा है।

देहरादून के स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय में मेडिकल फिजिक्स विभाग में सहायक प्रोफेसर के पद पर कार्यरत डाक्टर मुकेश बिज्लवाण के शोध पत्रों की आजकल अमेरिका में चर्चा हो रही है। दरअसल डॉक्टर मुकेश बिजल्वाण पिछले 15 सालों से आयोनाइजिंग रेडिएशन और मानव स्वास्थ्य पर इसके असर को लेकर शोध कर रहे हैं। डाक्टर बिज्लवाण का काम भारत के सामान्य और हाई रेडिएशन वाले इलाकों में रेडॉन, थोरॉन गैस और उनसे होने वाले विकिरण प्रभावों के अध्ययन पर केंद्रित है।

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डॉ. मुकेश प्रसाद बिजल्वाण के शोध को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। उनके दो रिसर्च पेपर संयुक्त राष्ट्र की वैज्ञानिक समिति UNSCEAR की प्रतिष्ठित रिपोर्ट ‘Sources, Effects and Risks of Ionizing Radiation’ में शामिल किए गए हैं। जबकि अभी तक UNSCEAR की रिपोर्टों में ज्यादातर अमेरिका और यूरोपियन मुल्क के ही डेटा को ही ज्यादा जगह मिलती थी। खासकर भारत के शोध पत्र UNSCEAR में बहुत कम शामिल किए जाते रहे हैं।

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ऐसे में उनके रिसर्च पेपर का चयन भारतीय विज्ञान को दुनिया के मंच पर जगह दिलाता है।गौरतलब है कि डॉ. बिजल्वाण को 2016 में ताइवान में यंग साइंटिस्ट अवॉर्ड, भारत सरकार के DST से नेशनल पोस्ट-डॉक्टोरल फेलोशिप मिल चुकी है। वहीं 2025 में Elsevier-Stanford University की दुनिया के टॉप 2% वैज्ञानिकों की लिस्ट में भी जगह मिली थी। जबकि कई अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में डॉक्टर बिजल्वाण बेस्ट पेपर अवॉर्ड जीत चुके हैं।

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बहरहाल उत्तराखंड का सीना गर्व से चौड़ा है SRHU के अध्यक्ष डॉ. विजय धस्माना ने डाक्टर बिजल्वाण की इस उपलब्धि के लिए उन्हें शुभकामनाएं दी है और कहा कि, “यह उपलब्धि विश्वविद्यालय की रिसर्च क्वालिटी और अकादमिक एक्सीलेंस को दर्शाती है”.

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