… तो एक हफ्ते में 8 लाख का पानी पी रहे है दूनवासी !

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पहाड़ों में कुदरती नौले-धारों के पानी को छोड़ देहरादून में शिफ्ट हुए। उम्मीद थी कि यहां नलों से सीधे किचन में पानी आएगा। लेकिन अब साल-दर- साल गर्मियों में पानी किल्लत परेशानी का सबब बन रही है।

शहरी आबादी यूं ही बढ़ती रही तो आने वाले वक्त में वक्त में दून की देह में आबाद हुई नई कालोनी और पुराने मुहल्लों को पानी सप्लाई करना प्रशासन के लिए अग्निपरीक्षा बन जाएगा। बिसलरी से प्यास बुझाने वाले आला हाकिम जनता की कसौटी पर खरे नहीं उतर पाएंगे और अग्निपरीक्षा में उनका फेल हो जाना पक्का हो जाएगा।

दरअसल इस साल जब देहरादून का तापमान 38-40 डिग्री सेल्सियस को छू रहा है तब पानी के लिए हर मुहल्ले में कोहराम मचा हुआ है। आलम ये है कि अवाम के गलों को तर करने के लिए पेयजल महकमे को टेंकर्स से पानी सप्लाई करना पड़ रहा है। देहरादून में विभाग के पास अपने सिर्फ 15 टेंकर हैं जिनके बूते दून का काम नहीं चल पा रहा है ऐसे में महकमे ने 66 टेंकर किराए पर ले रखे हैं।

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बताया जा रहा है कि एक टैंकर एक दिन में सिर्फ चार फेरे ही लगा पा रहा है और विभाग टेंकर का किराया 600 रूपए रोज दे रहा है। मतलब हर हफ्ते विभाग को 8 लाख रूपए बेमतलब खर्च करने पड़ रहे हैं। बेमतलब इसलिए कि अगर देहरादून की जरूरत को पूरा करने के लिए बांदल स्रोत और ट्यूबवेल अपनी क्षमता के हिसाब से पूरा पानी देते तो पानी सप्लाई पर खर्च होने वाले 8 लाख रूपए किसी दूसरे काम आ सकते थे।

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बताया जा रहा है कि बांदल स्रोत की क्षमता 20 एमएलडी यानि बीस लाख लीटर प्रतिदिन पानी देने की है जबकि लगातार तपते मई महीने में इसकी क्षमता 20 एमएलडी से सिमट कर 8 एमएलडी की रह गई है। मतलब हर रोज 12 एमएलडी कम। जाहिर सी बात है इस हालात में महकमे के पास प्यास बुझाने के लिए सिर्फ टैंकर्स का ही सहारा हैं। तो तय है कि जब टैंकर से मुहल्लों में पानी सप्लाई किया जाएगा तो सिर्फ प्यास ही बुझती होगी, तसल्ली से नहाने की उम्मीद करना तो ख्याली पुलाव बनाने जैसा होगा।

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ऐसे में जरूरत है जंगल बचाने की , बारिश के पानी को घर से लेकर बरसाती नदी नालों में बचाने की। ताकि धरती बारामासा तृप्त रहे और गरमियों में पानी के लिए सूबे के किसी भी मुहल्ले में त्राहिमाम न हो। फिर चाहे वो दून के हों या हल्द्वानी के या फिर पौड़ी और टिहरी जिले के। क्योंकि जल संस्थान चेताता भी है “जल ही जीवन है”, “जल है तो कल है”।

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