उत्तराखंड के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में बिजली-पानी होगा अनिवार्य, मुख्य सचिव ने दिए कड़े निर्देश

ख़बर शेयर करें

उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने राज्य के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों और कार्यकत्रियों की सहूलियत के लिए बिजली और सुरक्षित पेयजल व्यवस्था अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं। सचिवालय में महिला एवं बाल विकास विभाग की राज्य स्तरीय मूल्यांकन एवं अनुश्रवण समिति की बैठक के दौरान ‘वात्सल्य’ और ‘मिशन शक्ति’ जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने साफ किया कि जिन केंद्रों में यह बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं, उनकी सूची बनाकर संबंधित विभागों के समन्वय से इन्हें तुरंत बहाल किया जाए।

यह भी पढ़ें -  देहरादून नगर निगम का सफाई नायक ₹3000 की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार, विजिलेंस का बड़ा एक्शन

इसके साथ ही, राशन वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए टेक होम राशन का शत-प्रतिशत वितरण ‘फेस रेकग्निशन सिस्टम’ के जरिए करने और व्यवस्था को सुधारने के लिए पुराने पंचायत भवनों की मरम्मत कर उन्हें आंगनबाड़ी के उपयोग में लाने का सुझाव दिया गया है।

बैठक में सभी राजकीय और स्वैच्छिक बाल देखरेख संस्थाओं का थर्ड पार्टी ऑडिट कराने और अंतरविभागीय समन्वय समितियों की बैठकें नियमित रूप से आयोजित करने का भी फैसला लिया गया ताकि बुनियादी समस्याओं का समय पर निस्तारण हो सके।

सड़क सुरक्षा और निगरानी होगी हाईटेक

वहीं मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने राज्य सड़क सुरक्षा कोष प्रबंध समिति की बैठक में प्रदेश की ट्रैफिक और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई अहम फैसले लिए गए हैं। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए हैं कि परिवहन, पुलिस, राज्यकर और खनन विभाग के बीच बेहतर तालमेल के लिए ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन कैमरों से मिलने वाले डेटा का सामूहिक उपयोग किया जाए, जिसके लिए परिवहन विभाग को एक एकीकृत कार्ययोजना तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

यह भी पढ़ें -  10 लाख तक के विकास कार्यों को सीधे ग्राम पंचायतों को सौंपने की उठी मांग, पलायन रोकने की बड़ी पहल

इस बैठक में सड़क सुरक्षा से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों को मंजूरी देने के साथ ही यह भी तय किया गया कि परिवहन और पुलिस विभाग अपने चालानों की संकलित रिपोर्ट हर महीने मुख्य सचिव कार्यालय को भेजेंगे। इसके अलावा, सड़कों पर साइनेज और रोड फर्नीचर लगाने का काम लोक निर्माण विभाग करेगा, और जिन जरूरी कार्यों के लिए विभागीय बजट उपलब्ध नहीं है, उन्हें सड़क सुरक्षा कोष से फंड दिया जाएगा; जबकि कार्यों में किसी भी तरह के दोहराव को रोकने के लिए प्रस्तावों को समिति के समक्ष रखने से पहले एक उपसमिति गठित कर उनकी बारीकी से स्क्रूटिनी की जाएगी।