केंद्र सरकार ने ग्रामीण विकास और रोजगार की दिशा में एक ऐतिहासिक बदलाव करते हुए ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन’ यानी ‘जी राम जी’ कानून को पूरे देश में लागू करने की घोषणा कर दी है। एक जुलाई से प्रभावी होने वाला यह नया कानून महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम यानी मनरेगा का स्थान लेगा।
इस क्रांतिकारी कदम के जरिए सरकार का लक्ष्य ग्रामीण इलाकों में रहने वाले श्रमिकों को अधिक आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है। नए नियमों के तहत अब श्रमिकों को साल में 100 दिन के बजाय 125 दिनों के रोजगार की वैधानिक गारंटी मिलेगी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और गाँवों में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।
श्रमिकों के लिए बढ़ी आजीविका सुरक्षा
नए कानून के लागू होने से ग्रामीण क्षेत्रों के श्रमिकों को अब साल के अधिकांश समय काम मिलने का भरोसा रहेगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी श्रमिक को काम मांगने के बाद तय समय सीमा के भीतर रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो वह नियमानुसार बेरोजगारी भत्ता पाने का हकदार होगा।
इसके अलावा, मजदूरी का भुगतान सीधे श्रमिकों के बैंक या डाकघर खातों में DBT के माध्यम से किया जाएगा। भुगतान प्रक्रिया को पारसमय और पारदर्शी बनाने के लिए यह व्यवस्था की गई है कि मास्टर रोल बंद होने के 15 दिनों के भीतर श्रमिकों को उनकी मेहनत का पैसा मिल जाए।
पुराने कार्डों की वैधता और भारी-भरकम बजट का आवंटन
सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि पुराने कानून से नए कानून में बदलाव की प्रक्रिया के दौरान श्रमिकों को किसी भी तरह की परेशानी न हो। जब तक नए जॉब कार्ड जारी नहीं हो जाते, तब तक पुराने कार्ड पूरी तरह वैध रहेंगे और वर्तमान में चल रहे कार्य बिना किसी रुकावट के जारी रहेंगे।
इस विशाल योजना के सफल संचालन के लिए सरकार ने 95,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का प्रावधान किया है, जिसे राज्यों की सहायता से बढ़ाकर 1.51 लाख करोड़ रुपये तक ले जाया जा सकता है। प्रशासनिक खर्चों के लिए भी बजट को 6 फीसदी से बढ़ाकर 9 प्रतिशत कर दिया गया है ताकि योजना का जमीनी स्तर पर बेहतर प्रबंधन हो सके।

