आज अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस है। अस्पताल में अशक्त मरीजों के लिए देवदूत मानी जाने वाली नर्सेस को आज दुनिया सलाम ठोक कर शुभकामना दे रही है। 12 मई को हर साल International Nurses Day फ्लोरेंस नाइटिंगेल की याद में मनाया जाता है।
12 मई 1820 को फ्लोरेंस का जन्म हुआ था। जिनके सेवा भाव को देखकर “लेडी विद द लैंप” पुकारा जाता था। फ्लोरेंस नाइटिंगेल को ही मॉडर्न नर्सिंग की फाउंडर माना जाता है। 1854 में क्रीमियन वॉर के दौरान फ्लोरेंस रात-रात भर लालटेन लेकर घायल सैनिकों की सेवा करती थीं। फ्लोरेंस के सेवा भाव ने ही नर्सिंग को ‘प्रोफेशन’ का दर्जा दिलाया।
बहरहाल साल 1965 में इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ नर्सेस ICN ने पहली बार यह दिवस मनाया। लेकिन साल 1974 से 12 मई की तारीख नर्स डे के लिए तय कर दी गई। देखा जाए तो डॉक्टर मरीज का जांच-पड़ताल कर इलाज लिखते हैं, और नर्स अपनी सेवाभाव से उसे अमलीजामा पहनाती हैं ताकि मरीज स्वस्थ हो सके।
मरीज के जिस्म से बीमारी को भगाने के लिए नर्स इंजेक्शन, दवा, पट्टी, तो देती ही हैं मरीज के भीतर जीने का हौसला भी बढ़ाती हैं। देखा जाए तो नर्सिंग सिर्फ ‘इंजेक्शन लगाना’ नहीं है. ये क्रिटिकल केयर, इमरजेंसी, ऑपरेशन थिएटर, मेंटल हेल्थ सब संभालती हैं।

देखा जाए तो देश भर मे 80 फीसद से ज्यादा हेल्थकेयर सेंटर नर्सों के भरोसे चलते है। क्योंकि चिकित्सक को अस्पताल में भर्ती मरीज तक पहुंचने में भी व लगता है। कहा जाता है एक नर्स पर किया गया निवेश समाज में 16 गुना बढ़ कर मिलता है।
बावजूद इसके उत्तराखंड में नर्सेज बेरोजगार संघ के बैनर तले आंदोलन चल रहा है। जो धीरे-धीरे तेज हो रहा है। ऐसा नहीं है कि राज्य के अस्पतालों को नर्सेज की जरूरत न हो, मरीजों का इतना दबाब है कि सरकारी अस्पतालों में तकरीबन तीन हजार से ज्यादा नर्सों की दरकार है।
खैर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी नर्सों को अन्तर्राष्ट्रीय नर्स डे की शुभकामनाएं दी हैं। सीएम ने अपने फेसबुक पेज पर एक पोस्ट अपलोड करते हुए लिखा है –
“सेवा, समर्पण और संवेदना की अद्भुत मिसाल सभी नर्सों को अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। आपकी निस्वार्थ सेवा, करुणा और मानवता के प्रति समर्पण समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। “
प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने हेतु हमारी सरकार कृत संकल्पित भाव से कार्य कर रही है। इसी क्रम में स्वास्थ्य विभाग में रिक्त पदों को तेजी से भरने की प्रक्रिया गतिमान है, ताकि आमजन को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

