पश्चिमी एशिया में गहराते संकट और अमेरिका-ईरान के बीच बने नाजुक हालातों के बीच ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची इसी सप्ताह भारत के दौरे पर आ रहे हैं। वह 14-15 मई को भारत की अध्यक्षता में आयोजित होने वाली ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक में हिस्सा लेंगे।
साल 2024 में ब्रिक्स का पूर्ण सदस्य बनने के बाद ईरान के किसी बड़े नेता की यह पहली भारत यात्रा है, जिसे वैश्विक कूटनीति के नजरिए से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अराघची के बीच होने वाली इस मुलाकात के दौरान ईरान का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी स्वीकार्यता बढ़ाना और पश्चिमी देशों के दबाव को कम करने का संदेश देना होगा।
होरमुज जलडमरूमध्य और वैश्विक सुरक्षा की चुनौती
इस उच्च स्तरीय बैठक में सबसे प्रमुख मुद्दा होरमुज जलडमरूमध्य में जारी तनाव और वहां जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना रहेगा। भारत के लिए यह क्षेत्र रणनीतिक और आर्थिक रूप से बहुत संवेदनशील है क्योंकि देश की कच्चा तेल और एलपीजी आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है।
सूत्रों के मुताबिक, भारत इस वार्ता के जरिए एक कूटनीतिक संतुलन बनाने की कोशिश करेगा ताकि व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। ईरान भी इस मंच का उपयोग ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों के बीच अपनी सक्रिय भूमिका को साबित करने के लिए करना चाहता है, ताकि दुनिया को यह बताया जा सके कि वह वैश्विक संकटों के बीच कूटनीतिक समाधान का हिस्सा बनने के लिए तैयार है।

