उत्तराखंड के सरकारी और अशासकीय स्कूलों में आगामी 22 मई से मासिक परीक्षाएं शुरू होने जा रही हैं, लेकिन विद्यार्थियों के पास पूरी पाठ्य पुस्तकें न होने के कारण उनकी तैयारी अधर में लटकी हुई है। राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ ने इस स्थिति पर कड़ी आपत्ति जताते हुए मांग की है कि जब तक सभी छात्रों को किताबें नहीं मिल जातीं, तब तक परीक्षा की तिथियों में बदलाव किया जाए। विभाग का दावा है कि 75 फीसदी किताबें पहुँच चुकी हैं और स्कूलों में ‘बुक बैंक’ की सुविधा दी गई है, परंतु शिक्षक संघ का कहना है कि किताबों की कमी और शिक्षकों की जनगणना ड्यूटी में व्यस्तता के चलते शिक्षण कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहा है, जिससे बिना उचित पढ़ाई के परीक्षा कराना छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा।
शिक्षकों की अन्य कार्यों में व्यस्तता से बढ़ा संकट
प्रदेश के कई विद्यालयों में अभी तक सभी विषयों की पुस्तकें नहीं पहुँच पाई हैं, जिसके कारण छात्र पुरानी या अधूरी किताबों के सहारे परीक्षा की तैयारी करने को मजबूर हैं। प्राथमिक शिक्षक संघ के अनुसार, राज्य के अधिकतर विद्यालय वर्तमान में ‘एकल शिक्षक’ व्यवस्था या कामचलाऊ इंतजामों के भरोसे चल रहे हैं क्योंकि बड़ी संख्या में शिक्षकों को जनगणना जैसे गैर-शिक्षण कार्यों में लगा दिया गया है। ऐसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में बच्चों का पाठ्यक्रम पूरा नहीं हो पाया है, इसीलिए शिक्षक संगठन लगातार यह दबाव बना रहे हैं कि विभाग को पहले संसाधन पूरे करने चाहिए और उसके बाद ही परीक्षा की समय सारणी को लागू करना चाहिए ताकि शिक्षा की गुणवत्ता बनी रहे।
तीन माह से वेतन न मिलने पर शिक्षकों में भारी आक्रोश
शिक्षा विभाग के सामने केवल परीक्षाओं की चुनौती ही नहीं है, बल्कि अशासकीय माध्यमिक शिक्षकों के वेतन का मुद्दा भी गरमाता जा रहा है। पिछले तीन महीनों से वेतन न मिलने के कारण शिक्षकों में गहरा असंतोष है और उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि 15 मई तक वेतन बजट स्वीकृत कर जारी नहीं किया गया, तो वे 16 मई को शिक्षा महानिदेशालय पर जोरदार प्रदर्शन करेंगे। शिक्षक संघ के पदाधिकारियों का आरोप है कि मुख्य सचिव के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद विभाग इस गंभीर मसले पर ढुलमुल रवैया अपना रहा है। आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षक अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं, जिससे आने वाले दिनों में शैक्षणिक व्यवस्था और अधिक प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।

