ऋषिकेश में ‘बधाई’ वसूली की सीमा तय: ₹2100 से अधिक बधाई लेने पर होगी कार्रवाई

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तीर्थनगरी ऋषिकेश में शादी-ब्याह, बच्चे के जन्म और अन्य मांगलिक उत्सवों पर किन्नरों द्वारा की जाने वाली मनमानी वसूली पर नकेल कसने के लिए नगर निगम ने एक बड़ा फैसला लिया है। नगर निगम की बोर्ड बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया है कि अब किसी भी परिवार से 2100 रुपये से ज्यादा की ‘बधाई’ नहीं ली जा सकेगी।

अक्सर यह देखा गया है कि लोग अपनी खुशी के मौकों पर किन्नरों द्वारा मुंह मांगी रकम मांगने और न देने पर हंगामा या मारपीट की स्थिति से परेशान रहते थे। जनता की इसी समस्या को देखते हुए पार्षदों ने इस सीमा को तय करने का सुझाव दिया, जिसे अब आधिकारिक रूप से स्वीकार कर लिया गया है, ताकि शहर के नागरिकों को किसी भी तरह के मानसिक या आर्थिक उत्पीड़न का सामना न करना पड़े।

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पार्षदों के भत्ते पर बनी सहमति

नगर निगम की इस महत्वपूर्ण बैठक में पार्षदों को मिलने वाले भत्ते को लेकर भी सकारात्मक फैसला लिया गया है। बोर्ड ने पार्षदों को भत्ता देने की फाइल तैयार कर शासन को भेजने की अनुमति दे दी है, और शासन से मंजूरी मिलते ही यह लागू हो जाएगा।

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इसके अलावा, बैठक में शहर की बुनियादी सुविधाओं जैसे आवारा पशुओं की समस्या, खराब स्ट्रीट लाइटों को दुरुस्त करने और जर्जर सड़कों की मरम्मत जैसे मुद्दों पर भी पार्षदों ने अपनी बात रखी। नगर आयुक्त ने इन सभी समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया है, ताकि तीर्थनगरी की व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाया जा सके।

नेशनल मेयर काउंसिल की आगामी मेजबानी

बैठक के दौरान वेंडरों से वसूले जाने वाले तहबाजारी शुल्क को लेकर कुछ पार्षदों ने कड़ा विरोध जताया। उनका कहना था कि वेंडरों को अचानक 21 हजार रुपये के नोटिस देना अनुचित है, जबकि विभाग को नियमित रूप से कम शुल्क वसूलना चाहिए था।

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वहीं, ऋषिकेश के लिए एक गौरवपूर्ण खबर यह भी है कि इस साल यहाँ ‘नेशनल मेयर काउंसिल’ की बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें देशभर के विभिन्न नगर निगमों के मेयर शामिल होंगे। हालांकि इस कार्यक्रम के खर्च को लेकर अभी यह स्पष्ट होना बाकी है कि इसका वहन बोर्ड फंड से होगा या शहरी विकास निदेशालय करेगा, लेकिन इस आयोजन से ऋषिकेश को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान मिलने की उम्मीद है।