देहरादून। उत्तराखंड के किसानों से स्थानीय उत्पाद और वस्तुएं खरीदने के लिए भारत-तिब्बत सीमा पुलिस का करार एक साल के लिए और बढ़ा दिया गया है। पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा और आईटीबीपी मुख्यालय उत्तरी सीमांत के महानिरीक्षक मनु महाराज की उपस्थिति में हुए इस समझौते को ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए बेहद लाभकारी माना जा रहा है।
इस करार के विस्तार से अब तक उत्तराखंड के 450 से अधिक किसान परिवारों और 42 प्राथमिक सहकारी समितियों एवं किसान उत्पादक संगठनों को एक बड़े संस्थागत बाजार से जोड़ा जा चुका है। इस पहल के तहत किसानों द्वारा उत्पादित सामग्री की सीधी आपूर्ति सुरक्षा बलों को सुनिश्चित की जा रही है, जिससे उनकी आजीविका मजबूत हो रही है। इस पूरी व्यवस्था के अंतर्गत अब तक किसानों को 17.02 करोड़ रुपये की राशि सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की जा चुकी है।
आईटीबीपी द्वारा स्थानीय स्तर पर की जाने वाली इस खरीद के तहत पर्वतीय क्षेत्रों के उत्पादों को प्राथमिकता दी जा रही है। आंकड़ों के अनुसार, बल द्वारा साग-सब्जियों के अलावा तीन लाख 56 हजार किलोग्राम जीवित भेड़-बकरी, दो लाख 40 हजार किलोग्राम जीवित कुक्कुट पक्षी और 56 हजार किलोग्राम ट्राउट मछली की आपूर्ति की जा चुकी है।
सरकार और आईटीबीपी के बीच हुआ यह महत्वपूर्ण समझौता ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों से होने वाले पलायन को रोकने में भी मददगार साबित हो रहा है। अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की पहलों से स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के नए रास्ते खुलते हैं और किसानों को उनकी उपज का उचित और पारदर्शी मूल्य मिलता है।

