देहरादून। सिखों के प्रसिद्ध और पवित्र तीर्थ हेमकुंड साहिब यात्रा से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जिसके तहत इस साल हेमकुंड साहिब के कपाट आगामी 10 अक्टूबर को शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस वर्ष यह आध्यात्मिक यात्रा कुल मिलाकर करीब साढ़े चार महीने तक सुचारू रूप से चली है। कपाट बंद होने की इस घोषणा के साथ ही इस साल की तीर्थयात्रा के समापन की प्रक्रिया शुरू हो गई है, जिसका सीधा असर देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं पर पड़ा है।
गोविंदघाट गुरुद्वारे के मुख्य प्रबंधक सरदार सेवा सिंह ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि 10 अक्टूबर को कपाट शीतकाल के लिए पूरी तरह बंद करने की सभी तैयारियां प्रबंध समिति द्वारा पूरी कर ली गई हैं। ट्रस्ट को पूरी उम्मीद है कि कपाटबंदी के पावन दिन लगभग पांच हजार श्रद्धालु हेमकुंड साहिब में मौजूद रहकर इस प्रक्रिया के साक्षी बनेंगे। इसके अलावा, यात्रा के बाकी बचे हुए दिनों में करीब दस हजार और श्रद्धालुओं के हेमकुंड साहिब पहुंचने की पूरी संभावना जताई जा रही है।
कपाटबंदी के दिन होने वाले धार्मिक अनुष्ठानों की पूरी रूपरेखा भी साझा कर दी गई है, जिसके अनुसार उस दिन सुबह ठीक 10 बजे सुखमणि साहिब का पाठ आरंभ होगा। इसके बाद सुबह 11:20 बजे से पावन शब्द कीर्तन का आयोजन किया जाएगा और फिर दोपहर 12 बजे इस वर्ष की अंतिम अरदास संपन्न होगी। इन सभी धार्मिक आयोजनों के साथ ही पवित्र हेमकुंड साहिब के कपाट आगामी सर्दियों के मौसम के लिए आधिकारिक रूप से बंद कर दिए जाएंगे।
उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में स्थित होने के कारण हेमकुंड साहिब के कपाट हर साल सर्दियों की शुरुआत से पहले बंद कर दिए जाते हैं। इस दौरान भारी बर्फबारी और कड़ाके की ठंड के कारण यहां पहुंचना सुरक्षित नहीं रहता है। इन साढ़े चार महीनों के दौरान देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालुओं ने यहां पहुंचकर मत्था टेका और गुरु का आशीर्वाद प्राप्त किया है。 ट्रस्ट के अधिकारियों का कहना है कि इस बार की पूरी यात्रा शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुई है।
कपाट बंद होने के बाद अब अगले साल गर्मियों के मौसम में कपाट दोबारा खुलने पर ही श्रद्धालु फिर से हेमकुंड साहिब के दर्शन कर सकेंगे। स्थानीय प्रशासन और गुरुद्वारा प्रबंधन समिति आने वाले दिनों में यात्रा के इस अंतिम चरण को पूरी तरह सुचारू रूप से पूरा कराने के लिए मुस्तैद है। इस आखिरी समय में भी तीर्थयात्रियों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है और बड़ी संख्या में लोग लगातार गोविंदघाट और हेमकुंड की ओर रुख कर रहे हैं।

