हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार में गुरुवार सुबह हर-हर महादेव और बम-बम भोले के गगनभेदी जयकारों के साथ सावन मास की भव्य कांवड़ यात्रा का औपचारिक शुभारंभ हो गया। गंगाजल भरकर अपने-अपने गंतव्य के शिवालयों की ओर लौटने वाले करोड़ों शिवभक्तों की सुरक्षा के लिए पुलिस-प्रशासन ने अभेद्य सुरक्षा चक्र तैयार किया है। आस्था की यह विशाल यात्रा 11 अगस्त तक जारी रहेगी।
यात्रा के पहले ही दिन हरिद्वार स्थित हर की पैड़ी और प्रमुख गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। भगवा कपड़ों में सजे शिवभक्त, कंधों पर सुंदर कांवड़ और हाथों में गंगाजल लिए अपने शिवालयों की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। हालांकि यात्रा की आधिकारिक शुरुआत आज से हुई है, लेकिन इससे पहले भी हजारों भक्त जल भरकर रवाना हो चुके थे।
18 सुपर जोन और 6000 जवानों का कड़ा पहरा
करोड़ों कांवड़ियों की सुरक्षा और सुगम आवाजाही के लिए पूरे मेला क्षेत्र को 18 सुपर जोन, 40 जोन और 141 सेक्टरों में बांटा गया है। कांवड़ पटरी, नेशनल हाईवे, घाटों और प्रमुख मंदिरों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों के करीब 6000 जवानों को तैनात किया गया है, जो चप्पे-चप्पे पर गश्त कर रहे हैं।
भीड़ नियंत्रण और संदिग्ध गतिविधियों पर नज़र रखने के लिए हाईटेक सर्विलांस की मदद ली जा रही है। पूरे यात्रा मार्ग पर ड्रोन कैमरों, सीसीटीवी नेटवर्क और सेंट्रल कंट्रोल रूम के जरिए चौबीसों घंटे लाइव निगरानी रखी जा रही है, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
बाबा रामदेव बोले- ‘नशा और हुड़दंग शिव का अपमान’
कांवड़ यात्रा के शुभारंभ पर योग गुरु रामदेव ने श्रद्धालुओं से विशेष अपील की है। उन्होंने कहा कि सावन का महीना महादेव की साधना और भक्ति का पवित्र समय है। कुछ लोग इस दौरान हुड़दंग मचाते हैं या नशा करते हैं, जो सनातन धर्म की गरिमा को ठेस पहुंचाता है और भगवान शिव का अपमान है।
रामदेव ने सभी कांवड़ियों से यात्रा के दौरान पूरी तरह शिवभक्ति में लीन रहने और अनुशासन बनाए रखने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि समाज और प्रशासन की ओर से कांवड़ यात्रा को जो मान-सम्मान मिल रहा है, उसकी मर्यादा रखना हर शिवभक्त की ज़िम्मेदारी है।
गंगा जल को भगवान भोलेनाथ का प्रसाद मानकर श्रद्धालु पैदल ही सैकड़ों किलोमीटर दूर अपने-अपने राज्यों के शिवालयों के लिए निकल पड़े हैं। अगले कई दिनों तक हरिद्वार से लेकर उत्तर भारत के अलग-अलग राज्यों तक आस्था की यह अविरल धारा इसी तरह बहती दिखाई देगी।

