दुनियाभर में अपनी फोटोग्राफी का लोहा मनवाने वाले दिग्गज फोटोग्राफर रघु राय का निधन हो गया है। पांच दशकों से भी लंबे अपने करियर में उन्होंने भारत की राजनीति, संस्कृति और आम जीवन के हर पहलू को अपने कैमरे में कैद किया। उनकी खींची गई तस्वीरें महज फोटो नहीं, बल्कि इतिहास के जीवंत दस्तावेज हैं। भोपाल गैस त्रासदी के मार्मिक दर्द से लेकर मदर टेरेसा, इंदिरा गांधी और दलाई लामा जैसी महान हस्तियों के अनछुए पहलुओं को उन्होंने दुनिया के सामने रखा। दिल्ली, बनारस और आगरा जैसे शहरों की गलियों को जीवंत करने वाले रघु राय ने फोटोग्राफी को एक नई परिभाषा दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित कई दिग्गजों ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे फोटोग्राफी जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया है।
भोपाल त्रासदी और वो ‘झकझोर देने वाली तस्वीर’
रघु राय के करियर की सबसे प्रभावशाली और मार्मिक तस्वीरों में भोपाल गैस त्रासदी का वो चेहरा शामिल है, जिसने पूरी दुनिया को रुला दिया था। मलबे के बीच से झांकती एक मासूम बच्चे की वो आंखें आज भी उस भयावह त्रासदी की गवाह हैं। रघु राय ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने हमेशा उन पलों को कैद करने की कोशिश की जो सीधे दिल को छू जाएं।
महान हस्तियों के साथ खास जुड़ाव
उन्होंने देश की कई बड़ी शख्सियतों के जीवन को बेहद करीब से देखा और शूट किया। इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री बनने के बाद वे लगभग हर दूसरे दिन उनकी तस्वीरें खींचते थे। शिमला में एक पत्थर की दीवार पर खड़ी इंदिरा गांधी की तस्वीर रघु राय की पसंदीदा तस्वीरों में से एक थी। इसके अलावा मदर टेरेसा की करुणा और सेवा भाव को उकेरने वाली उनकी सीरीज ने भी वैश्विक स्तर पर प्रशंसा बटोरी।
सम्मान और अंतरराष्ट्रीय पहचान
रघु राय की प्रतिभा को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें 1972 में देश के चौथे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्मश्री से नवाजा था। उन्हें 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम और शरणार्थी संकट को दुनिया के सामने लाने के लिए यह सम्मान मिला था। इसके अलावा उन्हें 1992 में ‘फोटोग्राफर ऑफ द ईयर’ (अमेरिका) और 2019 में फ्रांस की एकेडमी डेस बीक्स-आर्ट्स द्वारा ‘विलियम क्लेन फोटोग्राफी पुरस्कार’ जैसे अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से भी सम्मानित किया गया।
इंजीनियरिंग से फोटोग्राफी तक का सफर
बहुत कम लोग जानते हैं कि रघु राय पेशे से सिविल इंजीनियर के तौर पर काम कर रहे थे, लेकिन उनका मन वहां नहीं लगा। 1960 के दशक में उन्होंने अपने भाई के कैमरे से गधे के एक छोटे बच्चे की ‘क्लोज-अप’ फोटो ली, जिसे लंदन के मशहूर अखबार ‘द टाइम्स’ ने उनके नाम के साथ छापा। इसी एक तस्वीर ने उन्हें फोटोग्राफी को अपना पेशा बनाने के लिए प्रेरित किया और फिर उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

