राजधानी देहरादून का एक बार, पांच थानेदार… आखिर किस बात का था इतना डर…? फिर पुलिस खुद ही बन गई तमाशा!

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देहरादून। पर्यटन नगरी के रूप में पहचाने जाने वाले उत्तराखंड में इन दिनों शराब के खिलाफ चल रहा अभियान चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है। खासकर राजधानी देहरादून में पुलिस की लगातार सख्त कार्रवाई ने न सिर्फ शराब कारोबारियों बल्कि आम लोगों के बीच भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। “ऑपरेशन प्रहार” के तहत हो रही ताबड़तोड़ कार्रवाई को लेकर जहां एक ओर प्रशासन अपनी पीठ थपथपा रहा है, वहीं दूसरी ओर शहर का माहौल कुछ अलग ही कहानी बयां कर रहा है।
राजपुर रोड जैसे प्रमुख और संवेदनशील इलाके में स्थित एक बार में हाल ही में जो घटनाक्रम सामने आया, उसने इस पूरे अभियान की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा दिया है। बताया जा रहा है कि अचानक अलग-अलग थानों की भारी पुलिस फोर्स एक ही बार में पहुंच गई और उसे बंद कराने की कार्रवाई शुरू कर दी। हालात ऐसे बने मानो किसी बड़े आपातकालीन या आतंकी घटना पर कार्रवाई की जा रही हो। मौके पर मौजूद लोग इस नजारे को देखकर हैरान रह गए।
सबसे दिलचस्प पहलू यह रहा कि उसी दौरान पुलिस के आईजी गढ़वाल भी अपने परिवार के साथ उस बार में मौजूद थे। भारी पुलिस बल को एक साथ देखकर वे भी अचंभित रह गए। जब उन्होंने स्थिति को समझने की कोशिश की तो सभी थाना प्रभारियों की लोकेशन मंगवाई गई, जिसमें यह सामने आया कि पांच अलग-अलग थानों के प्रभारी एक ही जगह पर मौजूद हैं। यह जानकारी अपने आप में कई सवाल खड़े करती है कि आखिर ऐसी कौन सी स्थिति बन गई थी, जिसके लिए इतने बड़े स्तर पर पुलिस बल को एकत्र किया गया।
घटना के बाद अब शहर में तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। कुछ लोग इसे पुलिस की ओवरएक्टिवनेस बता रहे हैं। वहीं, यह भी चर्चा जोरों पर है कि क्या आईजी गढ़वाल ने मौके पर मौजूद एसपी को वहां से जाने के निर्देश दिए या फिर इस पूरे घटनाक्रम के पीछे कोई और वजह है। बार और पुलिस के बीच किसी संभावित कनेक्शन को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही हैं।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या शराब के खिलाफ चल रहा अभियान वास्तव में कानून व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए है या फिर इसके पीछे कुछ और रणनीतियां काम कर रही हैं। पर्यटन नगरी के रूप में पहचान रखने वाले देहरादून में इस तरह की घटनाएं न सिर्फ स्थानीय लोगों को बल्कि यहां आने वाले पर्यटकों को भी प्रभावित कर सकती हैं।
फिलहाल, प्रशासन की ओर से इस मामले पर कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है, लेकिन जिस तरह से यह मुद्दा तूल पकड़ रहा है, उससे यह साफ है कि आने वाले दिनों में इस पर और भी खुलासे हो सकते हैं। अब देखना यह होगा कि पुलिस विभाग इस पूरे घटनाक्रम पर क्या सफाई देता है और क्या वाकई “ऑपरेशन प्रहार” अपने उद्देश्य में सफल साबित हो पाता है या नहीं।