देहरादून स्थित सगंध पौधा केंद्र सेलाकुई ने सौर ऊर्जा और कृषि को जोड़ने वाला एक क्रांतिकारी मॉडल तैयार किया है। इस नई तकनीक के तहत अब सोलर प्लांट के नीचे खाली पड़ी जमीन पर ग्रीन पॉलीहाउस बनाकर फसलें उगाई जा सकेंगी। अभी तक सोलर प्लांट का उपयोग केवल बिजली उत्पादन के लिए किया जा रहा था और उसके नीचे की जमीन बेकार पड़ी रहती थी। लेकिन इस नए मॉडल से अब उसी जमीन पर सब्जी, फूलों और सुगंधित पौधों की खेती की जा सकेगी, जिससे किसानों की आमदनी दोगुनी होने की उम्मीद है। सेलाकुई केंद्र का दावा है कि सोलर प्लांट के साथ पॉलीहाउस का ऐसा अनोखा मॉडल देश में पहली बार तैयार किया गया है और जल्द ही इसे पेटेंट करवाकर धरातल पर उतारा जाएगा।
बेकार पड़ी जमीन का होगा सही इस्तेमाल
उत्तराखंड में सौर ऊर्जा का उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है और यह 1000 मेगावाट के आंकड़े को पार कर गया है। बड़ी संख्या में लोगों ने स्वरोजगार के लिए सोलर प्लांट लगाए हैं, लेकिन पैनल के नीचे की जमीन का कोई उपयोग नहीं हो रहा था। सगंध पौधा केंद्र ने इसी कमी को दूर करने के लिए सोलर पैनल के नीचे नियंत्रित तापमान वाला पॉलीहाउस बनाने का मॉडल विकसित किया है। इससे न केवल जमीन का सदुपयोग होगा, बल्कि खेती के लिए अतिरिक्त जगह भी मिलेगी।
दोहरी आमदनी और मिट्टी की उर्वरता
इस मॉडल का सबसे बड़ा फायदा यह है कि बिजली बेचने से होने वाली कमाई के साथ-साथ फसलों की बिक्री से भी लाभ होगा। पॉलीहाउस के भीतर किसान नर्सरी तैयार कर सकेंगे और विभिन्न प्रकार की सब्जियां व सुगंधित पौधे उगा सकेंगे। सगंध पौधा केंद्र के निदेशक नृपेंद्र चौहान के अनुसार, इस पद्धति से खेती करने से मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहेगी, जो पर्यावरण संरक्षण के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
देशभर में अपनी तरह का पहला मॉडल
संस्थान का दावा है कि वर्तमान में उत्तराखंड समेत अन्य राज्यों में सोलर प्लांट तो बड़े पैमाने पर लगाए जा रहे हैं, लेकिन पैनल के ठीक नीचे पॉलीहाउस बनाकर खेती करने का एकीकृत मॉडल अब तक कहीं और सफल रूप से तैयार नहीं हुआ है। इस पहल से न केवल कृषि क्षेत्र में नवाचार आएगा, बल्कि राज्य में स्वरोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

